भारतीय तेल उद्योग गंभीर संकट में
29-Apr-2025 01:19 PM
भारतीय तेल उद्योग गंभीर संकट में
★ भारत का खाद्य तेल उद्योग इस समय एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने जैसे प्रयासों के बावजूद, सरसों जैसी प्रमुख तिलहनों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बनी हुई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
★ तेल आयात में वृद्धि के कारण घरेलू प्रसंस्करण इकाइयों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होता जा रहा है। सस्ते आयातित तेल बाजार में भर गए हैं, जिससे स्थानीय क्रशरों और रिफाइनरों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।
★ इस संकट को और गहरा किया है पशु चारे में DDGS (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स) के बढ़ते इस्तेमाल ने। DDGS की बढ़ती खपत के कारण पारंपरिक खल की मांग में तेज गिरावट आई है, जिससे तेल तिलहनों की क्रशिंग की मांग भी घटी है। इससे कई क्रशिंग इकाइयां आर्थिक रूप से अस्थिर हो गई हैं।
★ देशभर में कई छोटे और मध्यम स्तर के तेल प्रोसेसर या तो अपने प्लांट बंद कर रहे हैं या उत्पादन घटा रहे हैं। एक प्रमुख प्रोसेसर ने कहा, “आयात शुल्क बढ़ने के बाद भी MSP से नीचे भाव मिल रहे हैं, इस तरह काम करना मुश्किल है।”
★ किसानों से लेकर थोक विक्रेताओं तक, पूरी आपूर्ति श्रृंखला दबाव में है। कम रिटर्न, कमजोर मांग और नीतिगत अनिश्चितता ने सभी हितधारकों को असमंजस में डाल दिया है।
★ हालांकि इस स्थिति का फायदा उपभोक्ताओं को कम कीमतों के रूप में मिल रहा है, लेकिन दीर्घकाल में यह घरेलू उद्योग के लिए घातक साबित हो सकता है और देश को आयात पर अधिक निर्भर बना सकता है।
★ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ने DDGS के नियंत्रण, स्थानीय क्रशिंग को प्रोत्साहन और मूल्य समर्थन जैसी समग्र नीति पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले महीनों में खाद्य तेल क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
