बिजाई पिछड़ने से सरसों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
05-Dec-2024 07:56 PM
नई दिल्ली । मौसम की हालत पूरी तरह अनुकूल नहीं होने से सरसों की बिजाई प्रभावित हो रही है और इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है। सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में ऊंचे तापमान एवं सूखे खेतों ने किसानों को बिजाई की रफ्तार बढ़ाने की इजाजत नहीं दी।
इसके अलावा गेहूं एवं चना के ऊंचे भाव तथा इससे बेहतर आमदनी होने की उम्मीद ने किसानों को इसकी खेती का दायरा बढ़ाने के लिए प्रेरित- प्रोत्साहित किया।
पिछले सप्ताह तक सरसों का उत्पादन क्षेत्र 75.85 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 80.10 लाख हेक्टेयर तथा सामान्य औसत क्षेत्रफल 79.16 लाख हेक्टेयर से कम है।
पिछले रबी सीजन में इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण तिलहन फसल का रकबा बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था मगर अब तक संकेतों से प्रतीत होता है कि इस बार बिजाई उससे काफी पीछे रह जाएगी। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, बंगाल, बिहार एवं झारखंड सरसों के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
केन्द्र सरकार ने किसानों को क्षेत्रफल तथा उत्पादन बढ़ाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5650 रुपए प्रति क्विंटल से 300 रुपए या 7.30 प्रतिशत बढ़कर 5950 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है मगर यह ऊंचा समर्थन मूल्य किसानों को ज्यादा आकर्षित नहीं कर पा रहा है।
मौसम विभाग ने दिसम्बर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान जाड़े के मौसम में न्यूनतम एवं उच्चतम तापमान सामान्य औसत से ऊंचा रहने तथा कुछ समय तक धुंध एवं घने कोहरे का प्रकोप होने की आशंका व्यक्त की है जो सरसों फसल की प्रगति को प्रभावित कर सकता है। इसके बाजार पर नजर रखना आवश्यक है।
