बम्बई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में गन्ना किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया

19-Mar-2025 12:03 PM

बम्बई। देश के सबसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र में किसान अपने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान एकल किस्त में किए जाने की मांग कर रहे थे जबकि राज्य सरकार ने दो किस्तों में इसके भुगतान का नियम बना रखा था।

यह मामला अदालत में पहुंचा जहां किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया गया। उसके साथ ही अब चीनी मिलों को गन्ना के एफआरपी भुगतान एक ही किस्त में करना होगा।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार ने 21 फरवरी 2022 को एक रिजोल्यूशन जारी करके गन्ना का एफआरपी दो किस्तों में जारी करने की छूट चीनी मिलों को दी थी लेकिन बम्बई उच्च न्यायालय ने इस रिजोल्यूशन को गैर कानूनी तथा अवैध घोषित करके दो किस्तों के बजाए एक ही किस्त में गन्ना की कीमतों का भुगतान देने का आदेश दिया है।

इससे चीनी मिलों की कठिनाई बढ़ेगी जबकि गन्ना किसानों को राहत मिलेगी क्योंकि उन्हें भुगतान के लिए लम्बा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

अगर नियत समय सीमा के अंदर गन्ना के मूल्य का भुगतान नहीं किया गया तो किसानों को क्षतिपूर्ति भी प्राप्त हो सकती है।

शेतकारी संगठन ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए इस विवाद के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को कसूरवार ठहराया जो चीनी मिलों के मालिक हैं और इसे संचालित करते हैं।

वे किसानों के बजाए अपने स्वार्थ एवं लाभ पर जोर देते हैं। संगठन का कहना है कि एकल रूप में एफआरपी का भुगतान प्राप्त करना उत्पादकों का मौलिक अधिकार है और चीनी मिलर्स को इस नियम का उल्लंघन किसी भी हाल में नहीं करना चाहिए।

चीनी मिलर्स ने कहा था कि एकल रूप में गन्ना के एफआरपी का भुगतान करने से उस पर जबरदस्त वित्तीय भार पड़ेगा।

अनेक चीनी मिलें आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं जबकि अदालत के इस नए आदेश से उसकी कठिनाई और भी बढ़ जाएगी।