ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज स्थापित होने की संभावना बढ़ी

14-Sep-2026 12:57 PM

नई दिल्ली। संसार में चावल, गेहूं, मक्का एवं सोयाबीन का सर्वाधिक उत्पादन ब्रिक्स के सदस्य देशों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन एवं दक्षिण अफ्रीका में होता है। चीन, भारत और रूस गेहूं के, चीन और भारत चावल के, ब्राजील सोयाबीन के तथा चीन, ब्राजील एवं भारत मक्का के सबसे प्रमुख उत्पादक देश है।

इसके अलावा इन देशों में दलहनों का उत्पादन भी सबसे ज्यादा होता है। इसे देखते हुए इन देशों में एक साझा ग्रेन एक्सचेंज की स्थापना की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। 12-13 सितम्बर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18 वें ब्रिक्स सम्मेलन में इस आशय के एक प्रस्ताव पर सदस्य देशों में सहमति बन गई। 

दिलचस्प तथ्य यह है कि रूस चाहता है कि यह ग्रेन एक्सचेंज पायलट आधार पर इसी वर्ष आरंभ हो जाए और अगले वर्ष (2027) से यह पूर्वं व्यवस्थित रूप से कार्य करने लगे। नई दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया है कि इस एक्सचेंज की कार्य प्रणाली तथा उसके तौर-तरीकों पर और अधिक विचार विमर्श किया जाएगा।

घोषणा पत्र में आगे कहा गया है कि ब्रिक्स के सदस्य देशों ने वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा खाद्य उत्पादों की कीमतों में आने वाले भारी उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने की जरूरत पर जोर दिया है। इसके साथ-साथ तमाम खाद्य उत्पादों एवं उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

इस सम्बन्ध में ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच एक ग्रेन ट्रेडिंग प्लेटफार्म स्थापित करने का प्रयास आरंभ करने पर आम सहमति बन गई है। इसकी पूरी रुपरेखा तैयार करने के लिए आगे होने वाली बातचीत का स्वागत है। समय के साथ-साथ इस एक्सचेंज में अन्य कृषि उत्पादों एवं उर्वरकों को भी शामिल किया जाएगा। 

यदि ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज अस्तित्व में आता है तो यह अमरीका के शिकागों मर्केंटाइल एक्सचेंज (सीएमई) का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। रूस का कहना है कि ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज में कारोबार आरंभ होने पर सदस्य देशों को सालाना 2.50 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।