उड़द की बदौलत दलहनों के क्षेत्रफल में अच्छी बढ़ोत्तरी

14-Sep-2026 03:09 PM

नई दिल्ली। लम्बे समय तक पिछड़ने के बाद खरीफ कालीन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से आगे निकल गया है जो एक शुभ संकेत है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 11 सितम्बर तक दलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 118.46 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 116.79 लाख हेक्टेयर से 1.67 लाख हेक्टेयर अधिक है।

समीक्षाधीन अवधि के दौरान अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र 45.47 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 46.11 लाख हेक्टेयर, उड़द का बिजाई क्षेत्र 22.81 लाख हेक्टेयर से उछलकर 25.52 लाख हेक्टेयर तथा मोठ का रकबा 9.20 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 9.24 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जबकि मूंग का क्षेत्रफल 34.49 लाख हेक्टेयर से घटकर 33.30 लाख हेक्टेयर और अन्य दलहनों का बिजाई क्षेत्र 4.27 लाख हेक्टेयर से गिरकर 3.83 लाख हेक्टेयर रह गया। 

खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच गई है। मानसूनी वर्षा के असमान वितरण से फसलों की हालत कहीं उत्साहवर्द्धक तो कहीं निराशाजनक देखी जा रही है। तुवर के दोनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में इस बार पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।

अब सबका ध्यान सितम्बर की वर्षा पर टिका हुआ है। उड़द, मूंग एवं मोठ जैसी कम अवधि की दलहन फसलों के नए माल की आवक अगले महीने से बढ़ जाएगी मगर तुवर एक लम्बी अवधि वाली दलहन फसल है इसलिए इसके नए माल की आपूर्ति की रफ्तार दिसम्बर-जनवरी में ही जोर पकड़ सकेगी। 

बिजाई क्षेत्र में वृद्धि के बावजूद दलहन फसलों का उत्पादन बढ़ने में तब तक संदेह रहेगा जब तक मौसम एवं वर्षा की हालत अनुकूल नहीं हो जाती। सितम्बर में अच्छी बारिश की जरूरत है। महाराष्ट्र-गुजरात में वर्षा हुई है।