बासमती चावल के लिए जीआई टैग को हटाने पर भारत का सहमत होना मुश्किल
01-Oct-2025 01:35 PM
नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार संधि (एफटीए) के लिए होने वाली बातचीत के क्रम में यदि बासमती चावल के लिए संरक्षित भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग को हटाने का कोई प्रस्ताव सामने आता है तो भारत उसे स्वीकार नहीं करेगा।
दरअसल माना जा रहा है कि बासमती चावल के लिए यूरोपीय संघ भारत के समक्ष दो विकल्प रख सकता है- या तो भारत इस पर जी आई टैग का अपना दावा छोड़ दे या फिर पाकिस्तान के साथ इसे साझा करे।
ध्यान देने वाली बात है कि यूरोपीय संघ पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में उत्पादित लम्बे दाने वाले सुंगधित चावल को बासमती की मान्यता देते हुए अपने एक सदस्य देश- पोलैंड को इसके आयात की अनुमति प्रदान कर चुका है जबकि भारत इसका विरोध कर रहा है। इसमें यह मामला काफी जटिल हो गया है।
भारत की भांति पाकिस्तान ने भी यूरोपीय संघ में बासमती चावल को जी आई टैग की मान्यता देने के लिए आवेदन कर रखा है और हाल की घटना से भारत की चिंता बढ़ गई है। इसके चलते यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के लिए होने वाली बातचीत काफी जटिल मोड़ पर आ गई है।
यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता में गतिरोध को दूर करने के लिए प्रक्रियागत या कूटनीतिक उत्पादों का सहारा ले सकता है और वह जी आई टैंग को पाकिस्तान के साथ साझा करने पर जोर दे सकता है। भारत को यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं होगा और वह पाकिस्तानी चावल को बासमती का जीआई टैग देने का सतत विरोध करता रहेगा।
भारत यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ता से बासमती चावल के लिए जी आई टैग के मुद्दे को अलग नहीं कर सकता। उसने पहले ही यूरोपीय संघ को रियायत देते हुए व्यापार वार्ता में कृषि एवं डेयरी उत्पादों को शामिल कर लिया है।
बासमती चावल का जीआई टैग राष्ट्रीय अस्मिता का सवाल है और इस मामले को व्यापार वार्ता के दायरे से बाहर रखना लगभग असंभव है। बासमती चावल भारत की संप्रभुता एवं विरासत से जुड़ा हुआ है।
यदि यूरोपीय संघ इसे व्यापार वार्ता से अलग रखने पर जोर देता है तो यह सटासट भारत की संप्रभुता एवं विरासत पर प्रहार माना जाएगा जो व्यापार वार्ता के एजेंडे के खिलाफ होगा। ईयू में बासमती चावल के जीआई टैग का आवेदन लंबित रखा गया है।
