बासमती चावल का निर्यात मूल्य घटकर 17 वर्षों के निचले स्तर पर आया
12-Jun-2025 11:44 AM
नई दिल्ली। बासमती चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में जबरदस्त गिरावट आने के बावजूद भारतीय निर्यातकों को अपनी आमदनी का स्तर बरकरार रखने में सफलता मिल रही है क्योंकि इसकी निर्यात मात्रा में भारी बढ़ोत्तरी हो गई है। बासमती चावल के लिए कोई न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) लागू नहीं है इसलिए निर्यातक किसी भी मूल्य स्तर पर इसका अनुबंध करने के लिए स्वतंत्र है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार बासमती चावल का फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य मई 2024 में 1080 डॉलर प्रति टन चल रहा था जो मई 2025 में 23 प्रतिशत घटकर 831 डॉलर प्रति टन रह गया। ध्यान देने की बात है कि अक्टूबर 2024 में जब मौजूदा मार्केटिंग सीजन आरंभ हुआ था तब बासमती चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 977 डॉलर प्रति टन चल रहा था जो अक्टूबर 2023 में प्रचलित ऑफर मूल्य 1226 डॉलर प्रति टन से करीब 20 प्रतिशत नीचे था। पिछले आठ माह के दौरान इसमें 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
2007-08 के सीजन में बासमती चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 53 प्रतिशत उछलकर 907 डॉलर प्रति टन पर पहुंचा था और 2008-09 में यह पहली बार बढ़कर 1000 डॉलर प्रति टन की सीमा को पार कर गया था। उसके बाद से कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया। वर्ष 2014-15 में इसका निर्यात ऑफर मूल्य 1220 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गया।
चावल का वैश्विक बाजार भाव पिछले दो माह से सुस्त पड़ा हुआ है लेकिन बासमती चावल का निर्यात कारोबार बेहतर चल रहा है क्योंकि इसका भाव घटकर नीचे आ गया है। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार बासमती एक प्रीमियम क्वालिटी का चावल है और इसकी महत्ता को कायम रखने के लिए कीमतों को एक निश्चित स्तर से ज्यादा नहीं घटने देना चाहिए। बासमती चावल के दाम में भारी गिरावट आने से इसकी गुणवत्ता एवं विश्वनीयता के प्रति आशंका बढ़ती है और भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं होगा। इस बार बासमती चावल की मांग इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इसका दाम घटकर अत्यन्त नीचे आ गया है। यदि मेप लगाया गया तो निर्यात मात्रा घट सकती है।
