बासमती चावल का ऑफर मूल्य घटने से निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी
13-Jun-2025 05:32 PM
नई दिल्ली। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में भारतीय बासमती चावल की अच्छी मांग बनी हुई है और इसके अनुबंध तथा शिपमेंट की रफ्तार भी तेज है लेकिन इसके लिए निर्यातकों को इस प्रीमियम क्वालिटी के चावल के निर्यात ऑफर मूल्य को नीचे रखने के लिए विवश होना पड़ रहा है। मई 2024 में भारतीय बासमती चावल का फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य 1080 डॉलर प्रति टन चल रहा था जो मई 2025 में 23 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 831 डॉलर प्रति टन रह गया। निर्यात की मात्रा बढ़ने से बासमती चावल की कुल निर्यात आय गत वर्ष के आस-पास ही रहेगी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्तमान मार्केटिंग सीजन के शुरूआती महीनो में यानी अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 के दौरान भारत से बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 39.90 लाख टन पर पहुंच गया जो 2023-24 के मार्केटिंग सीजन की समान अवधि के शिपमेंट 34.30 लाख टन से 5.60 लाख या 16 प्रतिशत ज्यादा रहा। लेकिन औसत इकाई ऑफर मूल्य कमजोर रहने से इसकी कुल निर्यात आमदनी में अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी। ध्यान देने की बात है कि बासमती चावल पिछले कुछ दशकों से भारत के तीन शीर्ष कृषि निर्यात वाले उत्पादों में शामिल रहा है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार भारतीय निर्यातकों को बासमती चावल का अनुबंध नीचे मूल्य स्तर पर करना चाहिए ताकि इसकी प्रतिष्ठा एवं विश्वसनीयता बरकरार रह सके। बासमती सर्वश्रेष्ठ क्वालिटी का चावल होता है और इसलिए इसका दाम भी सबसे ऊंचा रहना चाहिए। दाम घटाकर निर्यात बढ़ाने का प्रयास भविष्य में नुकसानदायक साबित हो सकता है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पहले बासमती चावल के लिए 1200 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) लागू किया था जिसे बाद में घटाकर 950 डॉलर प्रति टन निर्धारित कर दिया और फिर निर्यातकों के आग्रह पर सितंबर 2024 में इस मेप को भी वापस ले लिया। लेकिन उम्मीद की जा रही थी कि बासमती चावल के निर्यात ऑफर मूल्य को ऊंचे स्तर पर बरकरार रखा जायेगा ताकि इसकी श्रेष्ठता कायम रह सके। लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हो रहा है।
