बासमती धान के कमजोर मंडी मूल्य की आज हो सकती है समीक्षा

11-Dec-2024 11:47 AM

नई दिल्ली । केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में आज यानी 11 दिसम्बर 2024 को उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति की एक महत्वपूर्ण मीटिंग होने वाली है जिसमें बासमती धान के कमजोर मंडी भाव के मामले की समीक्षा की जाएगी।

दरअसल केन्द्र सरकार ने बासमती चावल पर लगे 950 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है ताकि भारतीय निर्यातकों को पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धा का सामना करने में कठिनाई न हो।

उम्मीद की जा रही थी मेप की समाप्ति के बाद मिलर्स, निर्यातक एवं स्टॉकिस्ट किसानों से भारी मात्रा में बासमती धान की खरीद करेंगे और इससे बाजार भाव में तेजी आएगी।

निर्यातकों ने सरकार से कहा था कि यदि मेप को हटा दिया जाए तो किसानों को बासमती धान का ऊंचा मूल्य प्राप्त हो सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। 

उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर 2024 को केन्द्र सरकार ने बासमती चावल पर लगे मेप को वापस ले लिया था लेकिन बासमती धान का भाव किसानों को संतुष्ट करने वाले स्तर तक नहीं पहुंच सका है।

किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैधानिक गारंटी देने के लिए आंदोलन कर रहे हैं इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि किसानों को उसके उत्पादों का आकर्षक एवं लाभप्रद मूल्य अवश्य प्राप्त हो।

वैसे यह तथ्य ध्यान रखने लायक है कि बासमती धान के लिए न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित होता है और न ही सरकारी एजेंसियां इसकी खरीद करती है। प्रीमियम क्वालिटी के इस धान का भाव बाजार की शक्तियां नियत करती हैं। 

वैसे बासमती धान का भारित औसत मूल्य 13 सितम्बर को 2565 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा था जो अब बढ़कर 3070 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।

खासकर 1509 वैरायटी के धान का भाव कुछ सुधरा है लेकिन यह पिछले साल की समान अवधि में प्रचलित भारित औसत मूल्य 4016 रुपए प्रति क्विंटल से काफी पीछे है।

कृषि मंत्रालय की एक इकाई- एगमार्कनेट पोर्टल के आंकड़ों से पता चलता है कि 1509 वैरायटी के बासमती धान का भाव उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में 2500 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे तथा पंजाब-हरियाणा की कई मंडियों में 3000 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे चल रहा है।