बढ़त के बाद पिछड़ गया सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र

15-Jul-2025 05:12 PM

नई दिल्ली। खरीफ सीजन के प्रमुख तिलहन- सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र पहले गत वर्ष से कुछ आगे निकल गया था मगर अब करीब 9 लाख हेक्टेयर पीछे हो गया है।

हालांकि मध्य प्रदेश, तथा राजस्थान में मानसून की भरपूर बारिश हुई है मगर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई है। राजस्थान में सिर्फ सोयाबीन का क्षेत्रफल घटा है जबकि अन्य खरीफ फसलों की बिजाई बढ़ी है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 11 जुलाई तक राष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 99.03 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 107.78 लाख हेक्टेयर से 8.75 लाख हेक्टेयर तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 127.19 लाख हेक्टेयर से 28.16 लाख हेक्टेयर कम है।

हालांकि सोयाबीन की बिजाई के लिए अभी टाइम है और सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2024-25 सीजन के 4892 रुपए प्रति क्विंटल से 436 रुपए बढ़ाकर 2025-26 सीजन के लिए 5328 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है मगर बाजार भाव काफी नीचे होने से इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण कुछ घट सकता है। 

इंदौर स्थित एक महत्वपूर्ण संस्था- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने चालू खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन के घरेलू उत्पादन क्षेत्र में 5 प्रतिशत तक की गिरावट आने का अनुमान लगाया था जो कम से कम मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए सही प्रतीत होता है।

राजस्थान सोयाबीन का तीसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है मगर वहां इसका बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 10.25 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 9.30 लाख हेक्टेयर रह गया है। महाराष्ट्र के भी कुछ इलाकों में सोयाबीन की कम बिजाई होने की सूचना मिल रही है। 

वैसे मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 28.05 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 33 लाख हेक्टेयर, तिल का बिजाई क्षेत्र 3.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.48 लाख हेक्टेयर तथा अरंडी का रकबा 5 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 24 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा है जबकि सूरजमुखी का क्षेत्रफल 48-49 हजार हेक्टेयर के पिछले स्तर पर ही स्थिर है।

नाइजर सीड की बिजाई कम क्षेत्रफल में हुई है। खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई भी जारी है इसलिए आगे इसके क्षेत्रफल में क्रमिक रूप से सुधार आ सकता है।