चालू वर्ष के दौरान चावल के निर्यात में शानदार बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद

24-Jan-2025 04:19 PM

नई दिल्ली । घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति अच्छी रहने तथा बंदिशों का दौर समाप्त होने से चालू वर्ष के दौरान भारत से चावल का शानदार निर्यात होने की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 एवं 2024 के अधिकांश महीनों में गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रहा और सेला चावल पर भी 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लागू रहा लेकिन फिर भी चावल का कुल निर्यात क्रमश: 178.60 लाख टन तथा 178 लाख टन पर पहुंच गया।

दरअसल बासमती चावल ने स्थिति को सामान्य स्तर पर लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2023 की तुलना में 2024 के दौरान बासमती चावल का निर्यात 16 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 57 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया मगर सामान्य श्रेणी के चावल का निर्यात 7 प्रतिशत घटकर 121 लाख टन पर अटक गया। 

अक्टूबर 2024 से एक बार फिर चावल का शानदार निर्यात आरंभ हो गया जो दिसम्बर तक बरकरार रहा। जनवरी 2025 में इसका प्रदर्शन सामान्य रहने की संभावना है जबकि फरवरी से शिपमेंट की गति काफी बढ़ सकती है।

एशिया तथा अफ्रीका के अधिकांश परम्परागत खरीदार देश पुनः भारतीय चावल की तरफ आकर्षित हो चुके हैं और फिलीपींस तथा इंडोनेशिया जैसे गैर परम्परागत आयातक देश भी इसकी खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं जबकि आमतौर पर वहां थाईलैंड एवं इंडोनेशिया जैसे देशों से चावल का आयात होता रहा है। 

वर्ष 2022 में भारत से 222.70 लाख टन चावल का निर्यात हुआ था और यदि सरकारी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ तो वर्ष 2025 का शिपमेंट उसके आसपास पहुंच सकता है।

सामान्य श्रेणी के चावल का शिपमेंट पूरी तरह स्वतंत्र हो चुका है और डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर काफी कमजोर पड़ चुकी है।

इसके फलस्वरूप भारतीय निर्यातकों को अपने चावल के निर्यात ऑफर मूल्य को प्रतिस्पर्धी स्तर पर बरकरार रखने में सहायता मिलेगी।

वैसे भी भारतीय चावल सबसे सस्ते दाम पर उपलब्ध रहता है जिससे अफ्रीका के गरीब देश इसकी भारी खरीद करते हैं।