चीनी के अधिशेष उत्पादन से उद्योग की बढ़ सकती है कठिनाई

12-Jan-2026 12:52 PM

मुम्बई। लम्बे समय से ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला चीनी उद्योग 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में विरोधाभासी संकट से जूझ रहा है। घरेलू सीजन के दौरान चीनी घरेलू उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं जिससे इसकी आपूर्ति उपलब्धता में इजाफा होगा।

दूसरी ओर इसकी मांग एवं खपत स्थिर रहने की संभावना है और एक और एथनॉल निर्माण में भी इसकी सिमित मात्रा का ही उपयोग हो सकेगा। इतना ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव नरम रहने से चीनी के निर्यात शिपमेंट की रफ्तार भी सुस्त देखी जा रही है। वैसे चीनी का एक्स फैक्टरी बिक्री मूल्य घट कर काफी नीचे आ गया है। 

उद्योग समीक्षकों ने आगाह किया है कि ऊंचे स्टॉक, घटते मार्जिन तथा मुद्रा प्रवाह में अवरोध के कारण मिलर्स को सही समय पर गन्ना उत्पादकों के बकाए का भुगतान बढ़ने में भारी कठिनाई हो सकती है।

चीनी मिलों में गन्ना की जोरदार क्रशिंग जारी है जिससे उस पर बकाया राशि का भार बढ़ता जा रहा है इसे देखते हुए सरकार को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। 

शीर्ष उद्योग संस्था- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन की पहली तिमाही में यानी अक्टूबर-दिसम्बर 2025 के दौरान चीनी का उत्पादन महाराष्ट्र में 62 प्रतिशत उछलकर 48.61 लाख टन पर पहुंचा जबकि उत्तर प्रदेश एवं कर्नाटक में भी उत्पादन बढ़ा। 

2025-26 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन के दौरान भारत में चीनी का सकल उत्पादन बढ़कर 343.50 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान इस्मा ने लगाया है जबकि अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने कुल उत्पादन 350 लाख टन पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की है।

दूसरी ओर चीनी की घरेलू खपत 280-285 लाख टन पर अटकने का अनुमान है। स्वास्थ्य सम्बन्धी- जागरूकता के कारण चीनी की खपत में कमी आ सकती है। ऐसी हालत में उद्योग के साथ चीनी का विशाल अधिशेष स्टॉक मौजूद रहेगा और इससे उसकी क्रियाशील पूंजी फंसी रहेगी।