चीनी का लुढ़कता बाजार
07-Dec-2024 10:28 AM
भरपूर आपूर्ति एवं कमजोर मांग के कारण चीनी का घरेलू बाजार भाव घटकर पिछले करीब डेढ़ साल के निचले स्तर पर आ गया है जिससे मिलर्स को गन्ना उत्पादकों के बकाए का सही समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में भारी कठिनाई होने लगी है।
सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ना की क्रशिंग जोर पकड़ने लगी है और यदि मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हुई तो आगामी समय में हालात और भी कठिन हो सकते हैं।
दरअसल चीनी के व्यापारिक निर्यात पर जून 2023 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है इसलिए मिलर्स की आमदनी का स्रोत सिमट कर घरेलू बाजार में बिक्री तक सीमित हो गया है और ऐसी हालत में यदि बाजार भाव कमजोर रहा तो उद्योग के लिए मुसीबत स्वाभाविक रूप से बढ़ जाएगी।
चीनी उद्योग लम्बे समय से केन्द्र सरकार से चीनी के एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी की मांग कर रहा है।
सरकार ने एक बार इस आशय के प्रस्ताव पर विचार भी किया था लेकिन बाद में इस पर निर्णय को स्थगित कर दिया क्योंकि उस समय चीनी का खुला बाजार भाव कुछ ऊंचा चल रहा था और सरकार त्यौहारी सीजन में कोई अतिरिक्त जोखिम नहीं उठाना चाहती थी।
मगर अब हालात तेजी से बदलते जा रहे हैं और इसलिए सरकार को उद्योग की इस जायज मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने में विलम्ब नहीं करना चाहिए।
उद्योग का यह तर्क बिल्कुल सही है कि गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में नियमित रूप से इजाफा होता रहा है जिससे चीनी के लागत खर्च में भारी बढ़ोत्तरी हो चुकी है मगर चीनी के एमएसपी में पिछले पांच साल से कोई वृद्धि नहीं की गई है।
इससे कीमतों में असंतुलन पैदा होने लगा है जो उद्योग के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकार को देश के लाखों छोटे एवं सीमांत गन्ना उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए चीनी की कीमतों को उचित स्तर पर रखने का प्रयास करना चाहिए।
चीनी का भाव घटकर लागत खर्च से नीचे आ गया है जिससे गन्ना के संशोधित एफआरपी का भुगतान करना मिलर्स के लिए कठिन होता जा रहा है।
उदाहरणस्वरूप महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पिछले चार माह के दौरान चीनी का दाम करीब 8 प्रतिशत घटकर 33,675 रुपए (397.60 डॉलर) प्रति टन पर आ गया है जो जून 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
सरकार से उद्योग ने चीनी के एमएसपी बढ़ाकर 40,000 रुपए प्रति टन निर्धारित करने का आग्रह किया है। वर्ष 2019 से ही एमएसपी में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है।
