चीनी का निर्यात 10 लाख टन के नियत कोटे तक पहुंचने में संदेह
25-Apr-2025 01:39 PM
जेनेवा। हालांकि केन्द्र सरकार ने 20 जनवरी 2025 को वर्तमान मार्केटिंग सीजन में शिपमेंट के लिए मिलर्स को 10 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा आवंटित किया था लेकिन इस पूरे कोटे का निर्यात शिपमेंट होने में संदेह है।
मशहूर फर्म - एमएसपी द्वारा जेनेवा में आयोजित ग्लोबल शुगर कांफ्रेंस में इस्मा के एक सदस्य ने कहा कि चीनी का वास्तविक निर्यात 6-7 लाख टन पर सिमट सकता है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव नरम पड़ गया है जबकि भारत में चीनी का दाम अपेक्षाकृत ऊंचा चल रहा है।
चीनी के सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- ब्राजील में गन्ना की क्रशिंग का नया मार्केटिंग सीजन आरंभ हो गया है जबकि भारत में इसका सीजन शीघ्र ही समाप्त होने वाला है।
भारत में इस बार चीनी के उत्पादन में भारी कमी आई है और इसलिए कीमतों का स्तर ऊंचा है। उधर ब्राजील में नई चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता अनवरत बढ़ती जाएगी जिससे वैश्विक बाजार मूल्य पर दबाव बना रह सकता है।
भारतीय मिलर्स निर्यातकों को ऊंचे दाम पर चीनी बेचने की कोशिश कर रहे हैं जबकि वैश्विक बाजार की हालत इसके लिए अनुकूल नहीं है।
इसके फलस्वरूप भारतीय चीनी के लिए निर्यात अनुबंध की गति काफी धीमी हो गई है। यद्यपि निर्यात के लिए 30 सितम्बर 2025 तक का समय उपलब्ध है लेकिन परिदृश्य संतोषजनक नहीं दिखाई पड़ता है।
इस वर्ष 15 अप्रैल तक देश में केवल करीब 254 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ जबकि जुलाई- सितम्बर के दौरान कर्नाटक एवं तमिलनाडु में गन्ना क्रशिंग के विशेष स्तर में होने वाले उत्पादन को भी शामिल कर किया जाए
तो 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में चीनी का कुल घरेलू उत्पादन 260 लाख टन के आसपास ही पहुंच सकेगा जो 2023-24 सीजन के उत्पादन 319 लाख टन से 59 लाख टन कम है।
इसके फलस्वरूप चालू मार्केटिंग सीजन के अंत में उद्योग के पास चीनी का कुल बकाया अधिशेष स्टॉक घटकर 50 लाख टन से नीचे आने की संभावना है।
यदि 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में उत्पादन नहीं बढ़ा तो घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता का संकट पैदा हो सकता है। चीनी के दाम में ज्यादा नरमी आना मुश्किल लगता है।
