चीनी का निर्यात 10 लाख टन के नियत लक्ष्य तक पहुंचना कठिन

11-Jun-2025 12:06 PM

मुम्बई। केन्द्र सरकार ने जनवरी में 2024-25 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के दौरान घरेलू मिलों के लिए 10 लाख टन चीनी के निर्यात का कोटा घोषित किया था लेकिन करीब पांच माह का समय बीत जाने के बावजूद इसके शिपमेंट की गति धीमी बनी हुई है। ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (आईस्टा) के अनुसार चालू सीजन में अब तक कुल 5.38 लाख टन चीनी का निर्यात संभव हो सका है। इसमें से भी 2.29 लाख टन का शिपमेंट अप्रैल-मई के दो महीनों में किया गया। इसके अलावा चीनी का कुछ स्टॉक अभी ट्रांजिट में है जिसे मिलाकर कुल निर्यात 5.61 लाख टन से ऊंचा बैठ रहा है।

आईस्टा की रिपोर्ट के अनुसार अभी तक देश से 4.10 लाख टन सफेद चीनी, 25382टन कच्ची चीनी तथा 81,845 टन रिफाइंड चीनी का निर्यात हो चुका है। रोमानिया इसका प्रमुख खरीदार रहा जिसने लगभग 1.18 लाख टन भारतीय चीनी का आयात किया इसके अलावा भारत से अफगानिस्तान, श्रीलंका जिबूती, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), लीबिया एवं तंजानिया जैसे देशों को भी अच्छी मात्रा में चीनी का निर्यात किया गया। निर्यात शिपमेंट की प्रक्रिया धीमी गति से जारी है। कुल निर्यात आंकड़े में वह 21 हजार टन से कुछ अधिक चीनी का स्टॉक भी शामिल है जो विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में अवस्थित रिफाइनरीज को भेजी गई थी। वहां से इसका सीधा शिपमेंट किया जाता है। 

एसोसिएशन के अनुसार 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन की पूरी अवधि में देश से लगभग 8 लाख टन चीनी का निर्यात हो सकता है जबकि 30 सितम्बर 2025 तक के लिए कुल 10 लाख टन के निर्यात का कोटा निर्धारित किया गया है। चीनी का वैश्विक बाजार भाव लगातार नरम पड़ता जा रहा है जबकि घरेलू प्रभाग में यह काफी हद तक मजबूत बना हुआ है। इसके फलस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय चीनी का दाम प्रतिस्पर्धी नहीं माना जा रहा है। 

2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान देश में लगभग 319 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था जो 2024-25 के सीजन में 17 प्रतिशत घटकर 263 लाख टन के आसपास सिमट जाने का अनुमान है। गन्ना के अभाव में अनेक चीनी मिलें नियत समय से पहले ही बंद हो गई और इसकी क्रशिंग का समय भी घट गया। 2025-26 को नया मार्केटिंग सीजन अक्टूबर से आरंभ होने वाला है।