चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्ध मजबूत बनाने की तैयारी
09-Jan-2026 08:11 PM
नई दिल्ली। अमरीका के साथ बढ़ती कड़वाहट के बीच भारत ने अब चीन, रूस, ब्राजील एवं दक्षिण अफ्रीका जैसे ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ व्यापारिक सम्बन्धों को मजबूत बनाने की योजना बनाई है और इसके लिए तैयारी भी आरंभ कर दी है। यदि अमरीका में 500 प्रतिशत टैरिफ वाला बिल पास हो गया
तो भारत के पास दो ही विकल्प होंगे- या तो वह इस अत्यन्त ऊंचे टैरिफ का सामना करे या फिर रूस से खनिज तेल का आयात बंद कर दे। दोनों ही पोजीशन काफी मुश्किल है।
भारत खनिज तेल का आयात बंद करके रूस से रिश्तों को बिगाड़ना नहीं चाहेगा क्योंकि वह भारत का सच्चा दोस्त है जबकि अमरीका सिर्फ अपने फायदे और स्वार्थ के लिए किसी देश को दोस्त या दुश्मन बनाता है।
इस बीच भारत अपने पड़ोसी देश- चीन के साथ सीमा व्यापार को पुनः शुरू करने पर विचार कर सकता है। चीन ने संकेत दिया है कि वह भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए तैयार है।
वर्तमान समय में यह द्विपक्षीय व्यापार पूरी तरह चीन के पक्ष में झुका हुआ है। भारत सरकार इस वास्तविकता से अच्छी तरह अवगत है कि चीन भी अमरीका की भांति भरोसेमंद दोस्त नहीं बन सकता है और यदि अमरीका ने चाइनीज वस्तुओं पर 500 प्रतिशत का टैरिफ लगे तो वह भारत जैसे विशाल बाजार में अपने उत्पादों का निर्यात ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने का हर संभव प्रयास अवश्य करेगा।
चीन के बारे में कहा जाता है कि वह बाहर से जितना मजबूत होने का दिखावा करता है अंदर से उतना मजबूत नहीं है। अमरीका में 500 प्रतिशत का टैरिफ लगने पर भारत की तुलना में चीन को ज्यादा जोर का झटका लगेगा।
अतः भारत को चीन के साथ सीमा व्यापार शुरू करते समय काफी सतर्क रहना होगा। चीन के साथ संबंधों को अनेक कसौटी पर परखने की जरूरत है। चीन को भारत से निर्यात बढ़ना चाहिए जबकि वहां से भारत से आयात घटाने का प्रयास होना जरुरी है।
