चीनी के उत्पादन में अच्छी वृद्धि से उद्योग पर बढ़ेगा दबाव
02-Jan-2026 08:48 PM
नई दिल्ली। पिछले सीजन की तुलना में इस बार चीनी के घरेलू उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी के संकेत मिल रहे हैं और यदि इसके अनुरूप उपयोग में वृद्धि नहीं हुई तो चालू मार्केटिंग सीजन के अंत में उद्योग के पास बकाया स्टॉक बढ़कर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएगा।
इससे मुद्रा प्रवाह की गति अवरुद्ध हो जाएगी और चीनी मिलों की क्रियाशील पूंजी गोदामों / वेयर हाउसों में फंसी रह जाएगी। इसके फलस्वरूप मिलर्स के पास गन्ना उत्पादकों के बकाए का सही समय पर भुगतान करने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं रहेगी।
एथनॉल से भी चीनी मिलों की आमदनी घटने की संभावना है क्योंकि सरकार ने गन्ना अवयवों से निर्मित एथनॉल का दाम नहीं बढ़ाया है और तेल विपणन कंपनियों ने जिस मात्रा में एथनॉल की आपूर्ति का टेंडर जारी किया है उसके उत्पादन के लिए महज 34 लाख टन चीनी के समुत्लय शीरे की जरूरत पड़ेगी।
चीनी का एक्स फैक्टरी बिक्री मूल्य इसके लागत खर्च से नीचे आ गया है। गन्ना की आपूर्ति तेजी से बढ़ रही है और चीनी मिलों को हर हाल में इसकी क्रशिंग करनी ही है।
इसके फलस्वरूप चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया तेजी से बढ़ने की संभावना है। बेहतर आदमनी होने पर मिलर्स को इसके भुगतान में कोई कठिनाई नहीं होती लेकिन इस बार स्थिति काफी भिन्न है।
चालू मार्केटिंग सीजन की पहली तिमाही में यानी अक्टूबर-दिसम्बर 2025 के दौरान देश में चीनी का उत्पादन बढ़कर 119 लाख टन पर पहुंच गया
जो गत वर्ष की समान अवधि के उत्पादन 95 लाख टन से 23 प्रतिशत ज्यादा है। आगामी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) के दौरान भी चीनी का शानदार उत्पादन होने के आसार हैं।
