चावल का निर्यात बढ़कर 215 लाख टन से ऊपर पहुंचा

12-Jan-2026 11:07 AM

हैदराबाद। प्रतिबंधों, विधेयकों एवं शुल्कों की समाप्ति के बाद भारत से चावल का निर्यात अत्यन्त तेजी से बढ़ने लगा है। वर्ष 2025 के दौरान इसमें 19 प्रतिशत से अधिक की शानदार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।

शुल्क समाप्ति के पश्चात भारतीय चावल का भाव सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी हो गया जिससे इसका शिपमेंट उछलकर अब तक के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। 

वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मार्च 2025 में सरकार द्वारा निर्यात नियंत्रणों को हटाए जाने के बाद भारतीय चावल के शिपमेंट की रफ्तार तेज हो गई।

इधर घरेलू प्रभाग में शानदार उत्पादन के कारण चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम हो गई और कीमतों में स्थिरता आ गई।

रुपए की कमजोर विनिमय दर ने भी शिपमेंट बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। केन्द्र सरकार वर्ष 2022 एवं 2023 में चावल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंध, नियंत्रण और शुल्क  लगाया था जिसे वर्ष 2025 तक आते-आते पूरी तरह हटा दिया। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसर भारत से वर्ष 2024 में 180.50 लाख टन चावल का निर्यात हुआ था जो वर्ष 2025 में 35 लाख टन या 19.4 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोत्तरी के साथ 215.50 लाख टन पर पहुंच गया। यह निर्यात वर्ष 2022 के सर्व कालीन सर्वोच्च स्तर पर 223 लाख टन के बाद दूसरा सबसे बड़ा है। 

इसके तहत गैर बासमती चावल का निर्यात 25 प्रतिशत उछलकर 151.50 लाख टन तथा बासमती चावल का शिपमेंट 8 प्रतिशत बढ़कर 64 लाख टन चावल के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

समीक्षाधीन अवधि के दौरान भारतीय गैर बसमती चावल का निर्यात बांग्ला देश, बेनिन, कैमरुन, आइवरी कोस्ट एवं जिबूती में तेजी से बढ़ा जबकि ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तथा ब्रिटेन में प्रीमियम क्वालिटी के बासमती चावल के शिपमेंट में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।