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23-Oct-2026 05:09 PM
हैदराबाद। अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण एशिया तथा दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में बारिश कम होने से धान की फसल प्रभावित होने के कारण चावल का उत्पादन घटने की संभावना है। इसके फलस्वरूप चावल का वैश्विक बाजार भाव तेज होने लगा है और आगे भी इसमें मजबूती का माहौल बरकरार रहने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि संसार में लगभग 90 प्रतिशत चावल का निर्यात इन्हीं एशियाई देशों से होता है। चावल के शीर्ष निर्यातक देशों में भारत, थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान, म्यांमार एवं कम्बोडिया आदि शामिल हैं। इसके अलावा अमरीका तथा पेरू सहित कुछ अन्य देशों से भी थोड़ी-बहुत मात्रा में चावल का निर्यात किया जाता है।
सामान्य श्रेणी के गैर बासमती चावल का आयात फिलीपींस तथा अफ्रीकी देशों में बड़े पैमाने पर होता है। चीन भी इसका एक महत्वपूर्ण आयातक देश है। इसके अलावा इंडोनेशिया, मलेशिया, बांग्ला देश, श्रीलंका तथा मालद्वीप आदि को अक्सर चावल के आयात की आवश्यकता पड़ती है।
ध्यान देने की बात है कि वर्ष 2011 तक थाईलैंड के चावल के दाम को अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में बेंचामार्क मूल्य माना जाता है लेकिन उसके बाद भारतीय चावल ने उसका स्थान ले लिया।
देखते ही देखते भारत न केवल दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बन गया बल्कि वैश्विक निर्यात बाजार में अच्छी भागीदारी को बढ़ाकर 40 प्रतिशत से ऊपर भी पहुंचा दिया। अब भारत से जितने चावल का वार्षिक निर्यात होता है वह थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार एवं पाकिस्तान के संयुक्त शिपमेंट से भी ज्यादा रहता है।
भारतीय चावल का निर्यात ऑफर मूल्य बढ़कर पिछले एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। थाईलैंड एवं वियतनाम के चावल का निर्यात ऑफर मूल्य भारतीय चावल से ऊंचा रहता है। भारत में उत्पादन घटने की आशंका से चावल के दाम में जैसे-जैसे बढ़ोत्तरी होगी, वैसे-वैसे अन्य निर्यातक देश भी अपने चावल का भाव बढ़ाते जाएंगे।