चावल का वैश्विक बाजार मूल्य नरम रहने से निर्यात आय में कमी की संभावना
10-Jul-2025 05:12 PM
नई दिल्ली। एशिया तथा अफ्रीका के प्रमुख आयातक देशों में मांग कमजोर रहने तथा भारत सहित अन्य निर्यातक देशों में स्टॉक की स्थिति बेहतर होने से चावल के वैश्विक बाजार मूल्य पर पिछले कई महीनों से दबाव बना हुआ है।
दरअसल जब से भारत सरकार ने सभी किस्मों एवं श्रेणियों के चावल के व्यापारिक निर्यात को नियंत्रणों तथा शुल्कों से मुक्त किया है तभी से इसके दाम में नरमी का दौर आरंभ हो गया जबकि उससे पूर्व चावल का भाव काफी ऊंचा चल रहा है।
जानकारों के अनुसार चूंकि भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है और वैश्विक निर्यात बाजार में 40-42 प्रतिशत की भागीदारी रखता है इसलिए यहां होने वाले नीतिगत बदलाव का वैश्विक बाजार पर तत्काल गहरा असर पड़ने लगता है।
भारत से चावल का निर्यात निरन्तर जारी है। अप्रैल-मई 2025 के दो महीनों में देश से 12.26 लाख टन बासमती चावल तथा करीब 23.16 लाख टन गैर बासमती चावल का निर्यात हुआ। ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने से पूर्व का यह आंकड़ा है।
जून में दोनों देशों के बीच भीषण संघर्ष हुआ जिससे भारतीय बासमती चावल का निर्यात थोड़ा-बहुत प्रभावित होने की आशंका है लेकिन कुल चावल निर्यात पर इसका विशेष असर पड़ना मुश्किल लगता है।
जून में गैर बासमती या सामान्य श्रेणी के चावल का निर्यात अपेक्षाकृत बेहतर रहने की उम्मीद है क्योंकि अफ्रीकी देशों द्वारा जनवरी-मार्च की तिमाही के दौरान जो भारी मात्रा में चावल मंगाया गया था उसका स्टॉक घटने लगा।
जुलाई में भी चावल का निर्यात प्रदर्शन बेहतर रहने के आसार हैं। भारत में चावल का निर्यात योग्य विशाल स्टॉक मौजूद है और इसका दाम भी प्रतिस्पर्धी स्तर पर बरकरार है। डॉलर के सापेक्ष रुपए की विनिमय दर भी आयातकों के लिए अनुकूल है।
भारत की प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान एवं म्यांमार सहित अन्य आपूर्तिकर्ता देशों को अपने चावल का निर्यात ऑफर मूल्य घटाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
थाईलैंड में लम्बे अरसे के बाद 5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल का दाम घटकर 400 डॉलर प्रति टन से नीचे आ गया है। वियतनाम और पाकिस्तान के चावल का भाव पहले से ही नीचे है। व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक निकट भविष्य में चावल के वैश्विक बाजार मूल्य में भारी उछाल आने की उम्मीद नहीं है।
