चावल निर्यातकों को ब्याज सब्सिडी देना जरुरी

08-Jan-2026 08:51 PM

नई दिल्ली। एक अग्रणी चावल निर्यातक संगठन ने केन्द्रीय वित्त मंत्री से आगामी आम बजट में निर्यात प्रोत्साहन, निर्यात ऋण पर ब्याज में राहत तथा किराया भाड़ा  में सहायता देने का आग्रह किया है।

इसके तहत निर्यात ऋण पर ब्याज में 4 प्रतिशत बिंदु की सब्सिडी देने और सड़क एवं रेलमार्ग से चावल के परिवहन पर तीन प्रतिशत का समर्थन देने की मांग की गई है।

संगठन के अध्यक्ष का कहना है कि ऐसे उपायों से निर्यातकों के लागत खर्च में प्रत्यक्ष रूप से कमी आएगी और निर्यात शिपमेंट की निरंतरता को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी।

इसके अलग बेहतर ढंग से चावल की परिवहन भी सुनिश्चित हो सकेगा। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने में ये प्रयास काफी कारगर साबित हो सकते हैं। 

संगठन के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत में 201 लाख टन चावल का शानदार निर्यात हुआ। भारत लम्बे समय से संसार में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है और इस पोजीशन को आगे भी बरकरार रखने के लिए निर्यातकों के सरकारी सहयोग-समर्थन एवं प्रोत्साहन की सख्त  आवश्यकता है।

चावल के वैश्विक निर्यात बाजार में भारत की भागीदारी 40-42 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रहती है। चावल के घरेलू उत्पादन में तेजी से हो रही बढ़ोत्तरी में निर्यात क्षेत्र का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है और इसकी बदौलत चावल के घरेलू बाजार मूल्य में काफी हद तक स्थिरता का माहौल बना रहता है।

रणनीतिक तौर पर चावल का निर्यात एक महत्वपूर्ण आर्थिक स्तम्भ बना हुआ है और इससे देश के अरबों रुपए की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है जो अर्थ व्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है। इससे किसानों की आमदनी एवं ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार का अवसर बढ़ाने और भारत के विदेश व्यापार घाटा को कम करने में सहायता मिल रही है।