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08-Oct-2026 03:26 PM
मुम्बई। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यू एमओ) के ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट में कहा गया है कि वर्ष 2026 के अंतिम महीनों तक पूर्वी एवं मध्यवर्ती टॉपिकल प्रशांत महासगार में समुद्री सतह का तापमान तेजी से बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। यह तापमान जितना बढ़ रहा है अल नीनो की ताकत, मजबूती एवं तीव्रता भी उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही है।
अल नीनो की शक्ति-मजबूती बढ़ने से दुनिया के अनेक देशों में सूखे का गंभीर संकट पैदा होने की आशंका है। इसके आरम्भिक संकेत भी मिलने लगे हैं। इससे कृषि उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है और छोटे तथा गरीब देशों की कठिनाई काफी बढ़ सकती है।
संगठन के अनुसार फरवरी 2027 तक अल नीनो का प्रभाव शीर्ष स्तर पर रहने की संभावना है और उसके बाद यह क्रमिक रूप से कमजोर पड़ सकता है। इस बीच वैश्विक स्तर पर गर्मी काफी बढ़ जाएगी और वर्षा के पैटर्न में बदलाव आ जाएगा। इसके फलस्वरूप समूचे संसार पर जलवायु में परिवर्तन का असर दिखाई पड़ेगा। कहीं भीषण गर्मी एवं सूखे का प्रकोप रहेगा तो कहीं भयंकर बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
डब्ल्यू एमओ की रिपोर्ट के अनुसार अल नीनो अब पूरी तरह व्यवस्थित हो चुका है और तेजी से मजबूत होता जा रहा है। दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया तथा लैटिन अमरीका के देशों पर इसका सर्वाधिक प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। इस बार का अल नीनो कम से कम 1950 के बाद सबसे ज्यादा शक्तिशाली रह सकता है।
अल नीनो से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, भारत, ब्राजील एवं अर्जेन्टीना आदि शामिल है। संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य-पूर्वी विषुवतीय प्रशांत महासागर के ऊपर नीनो 3.4 का सूचकांक (इंडेक्स) जून 2026 में तापमान की दृष्टि से सामान्य औसत से 1.6 डिग्री सेल्सियस ऊपर था जो अगस्त 2026 में उछलकर 2.5 डिग्री सेल्सियस ऊंचा हो गया। सितम्बर में भी तापमान का बढ़ना जारी रहा जबकि अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर में यह उछलकर 3.7 डिग्री सेल्सियस के शीर्ष स्तर पर पहुंच सकता है।