एथनॉल के अनुबंध को पूरा करने हेतु 127 लाख टन मक्का की जरूरत
06-May-2025 07:58 PM
पुणे। तेल विपणन कंपनियों ने 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान आपूर्ति के लिए मिलर्स एवं डिस्टीलरीज से मक्का से निर्मित 1184.35 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद का अनुबंध किया है इस एथनॉल के निर्यात के लिए 127 लाख टन से अधिक मक्का की जरूरत पड़ेगी।
यदि मक्का का इतना विशाल स्टॉक एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो गया तो अन्य खपतकर्ता उद्योगों के लिए आपूर्ति का संकट पैदा हो सकता है।
देश में मक्का की सर्वाधिक खपत पॉल्ट्री उद्योग में होती है। देश में उत्पादित मक्का का लगभग 60 प्रतिशत भाग पॉल्ट्री फीड एवं पशु आहार निर्माण में इस्तेमाल होता है इसके अलावा 65-70 लाख टन मक्का का वार्षिक उपयोग स्टार्च निर्माण में किया जाता है।
मानवीय खाद्य उद्देश्य में भी 10-15 प्रतिशत मक्का का प्रयोग होता है। ऐसी हालत में यदि कुल उत्पादन के लगभग एक-तिहाई भाग का उपयोग केवल एथनॉल निर्माण में होगा तो अन्य उद्देश्यों के लिए इसका समुचित स्टॉक उपलब्ध नहीं हो पाएगा।
उससे न केवल मक्का के दाम में बढ़ोत्तरी होगी बल्कि विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता भी बढ़ जाएगी। मक्का के आयात पर भारी-भरकम सीमा शुल्क लगा हुआ है।
कम्पाउंड लिवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन का कहना है कि जैव ईंधन एथनॉल के लिए मक्का का डायवर्जन होने से इसकी मांग एवं आपूर्ति का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है।
एथनॉल उत्पादन में मक्का की मांग एवं खपत स्थिर नहीं है बल्कि तेजी से बढ़ती जा रही है। जिससे इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज का अभाव महसूस होने लगा है और दाम तेज हो गया है।
पिछले चार साल के अंदर अखिल भारतीय स्तर पर मक्का का औसत मूल्य 14000/15000 रुपए प्रति टन से उछलकर 24000-25000 रुपए प्रति टन पर पहुंच गया है।
कीमतों में हुई इस भारी बढ़ोत्तरी के कारण उत्पाद का लागत खर्च काफी बढ़ गया है। एथनॉल की वजह से ऐसा हो रहा है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
इस बीच मक्का की प्रोसेसिंग से निर्मित डिस्टीलर्स ड्राईड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स यानी डीडी एस से ऑयल मील की खपत प्रभावित होने लगी है।
मक्का के डीडीजीएस में 28-30 प्रतिशत प्रोटीन मौजूद रहता है जबकि चावल वाले डीडीजीएस में इसका अंश 45 प्रतिशत तक उपस्थित रहता है।
