खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती की संभावना
07-Apr-2026 03:38 PM
नई दिल्ली। बढ़ती खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार विभिन्न प्रयासों पर गम्भीरतापूर्वक विचार कर रही है। इसमें खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भी शामिल है। हाल के सप्ताहों में खाद्य तेलों के दाम में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है जिससे आम उपभोक्ताओं की कठिनाई बढ़ गई है।
दरअसल ईरान-अमरीका युद्ध के कारण क्रूड खनिज तेल का वैश्विक बाजार भाव ऊंचा हो गया है और शिपिंग खर्च बढ़ने से अन्य वस्तुओं के साथ खाद्य तेलों का आयात भी महंगा बैठ रहा है।
रुपए की कमजोरी से भी आयात खर्च में वृद्धि हो रही है। खाद्य उत्पादों की कीमतों में इजाफा होने से आम लोग परेशान हैं। थोक बाजार तो कम बढ़ रहा है मगर खुदरा बाजार में उछाल ज्यादा देखा जा रहा है। सरसों तेल का खुदरा मूल्य 170 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है।
ध्यान देने की बात है कि भारत दुनिया में खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है। यहां खाद्य तेल की लगभग 60 प्रतिशत जरूरत को विदेशों से आयात के जरिए पूरा किया जाता है क्योंकि स्वदेशी उत्पादन 40 प्रतिशत मांग को ही पूरा करने में सक्षम रहता है। भारत में पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल का आयात विशाल मात्रा में किया जाता है। मार्च में पाम तेल का आयात गत वर्ष से करीब 20 प्रतिशत कम हुआ और सोया तेल के आयात में भी कुछ कमी आई।
जानकारों का कहना है कि सरकार कुछ महीनों के लिए खाद्य तेलों के आयात को सीमा शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखने पर विचार कर सकती है। खाद्य तेलों का दाम ऊंचा होने से एफएमसीजी उत्पादों का लागत खर्च बढ़ने लगा है। इससे उसका कारोबार भी प्रभावित हो सकता है।
