एथनॉल निर्माण के लिए 40-50 लाख टन चीनी के उपयोग की अनुमति दिए जाने की संभावना
12-Aug-2025 04:14 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में चीनी मिलों एवं डिस्टीलरीज को एथनॉल उत्पादन के लिए 40-50 लाख टन चीनी का उपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है।
केन्द्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग में संयुक्त सचिव (शुगर) का कहना है कि सरकार पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य नियत कर रही है और इसको हासिल करने के लिए कदम आगे बढ़ा रही है। दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर पर चीनी के दाम को भी स्थिर रखने का प्रयास किया जा रहा है।
संयुक्त सचिव के अनुसार घरेलू मांग एवं खपत तथा एथनॉल निर्माण की जरूरत को पूरा करने के बाद यदि उद्योग के पास चीनी का कोई अधिशेष स्टॉक बचता है तो उसके निर्यात की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।
अधिकारी सूत्रों के अनुसार सरकार अगले पांच वर्षों के दौरान एथनॉल उत्पादन संवर्धन के लिए एक व्यापक एवं विस्तृत रोडमैप पर भी काम कर रही है।
इसके तहत न केवल गन्ना से एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा बल्कि अन्य स्रोतों पर भी ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। इसमें स्वीट ऑरगम (मीठा ज्वार) भी शामिल है। इसे सिंचाई के लिए गन्ना से कम पानी की आवश्यकता पड़ती है और कर्नाटक तथा महाराष्ट्र में इसका फील्ड परीक्षण किया जा रहा है।
एथनॉल निर्माण के लिए टुकड़ी चावल का आवंटन बढ़ाए जाने की संभावना है। सरकार ने अक्टूबर 2025 से आरंभ होने वाले नए मार्केटिंग सीजन में अपने खरीदे जाने वाले चावल के स्टॉक में टूटे दाने वाले माल का अंश वर्तमान समय के 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत पर लाने का प्लान बनाया है।
इसका उद्देश्य 10 प्रतिशत टूट के अंश वाले चावल को खाद्य उद्देश्य में शामिल करना है जबकि 25 प्रतिशत टूटे चावल को एथनॉल निर्माण के लिए आवंटित करना है।
भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य जुलाई में हासिल हो गया जबकि अगले मार्केटिंग सीजन में उस लक्ष्य को बढ़ाया जा सकता है।
पिछले साल की तुलना में इस बार महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है और मौसम तथा मानसून की हालत भी अनुकूल है। इससे गन्ना एवं चीनी के उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है। एथनॉल निर्माण में चीनी का ज्यादा उपयोग होने से उद्योग पर स्टॉक का भार घट सकता है।
