एथनॉल निर्माण में चीनी का सीमित उपयोग होने की संभावना
12-Jan-2026 08:48 PM
नई दिल्ली। नवम्बर 2025 में 25 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल होने के बावजूद तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के लिए पेट्रोल में मिलाने हेतु गन्ना से निर्मित एथनॉल की करीब 289-307 करोड़ लीटर मात्रा का ही आवंटन किया गया है जबकि शेष करीब 70 प्रतिशत एथनॉल का कोटा अनाज आधारित डिस्टीलरीज को प्रदान किया गया है।
सरकार का कहना कि सबसे पहले खाद्य उद्देश्य के लिए चीनी की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जाएगी और इसके बाद एथनॉल निर्माण तथा निर्यात उद्देश्य में इसके कोटा आवंटन पर विचार किया जाएगा।
इस्मा ने पहले 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में एथनॉल उत्पादन में 50 लाख टन चीनी के समतुल्य गन्ना अवयवों के उपयोग का अनुमान लगाया था लेकिन एथनॉल की जितनी मात्रा का कोटा आवंटित किया गया है उसके उत्पादन के लिए महज 74 लाख टन चीनी के इस्तेमाल की जरूरत पड़ेगी।
इसके फलस्वरूप उद्योग के पास चीनी का विशाल अधिशेष स्टॉक बढ़ाने की संभावना है। इस्मा ने सरकार से कम से कम 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया था लेकिन इसमें भी 5 लाख टन की कटौती के साथ 15 लाख टन का ही निर्यात कोटा निर्धारित किया गया है।
विशाल स्टॉक एवं भरपूर उत्पादन की उम्मीद के कारण चीनी का एक्स फैक्टरी भाव घटकर महाराष्ट्र में 3600 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास आ गया है जबकि ऊंचे में यह 3720 रुपए प्रति क्विंटल बताया जा रहा है।
सीजन के आरंभ से अब तक चीनी के एक्स-मिल दाम में 8-10 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है और यह घटकर उत्पादन खर्च से भी नीचे आ गया है।
सरकार द्वारा घोषित 15 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा भी भाव बढ़ाने में कारगर साबित नहीं हो रहा है क्योंकि इसके शिपमेंट की रफ्तार काफी धीमी है। चीनी के निर्यात कोटे की समीक्षा मार्च 2026 के बाद की जा सकती है।
