एथनॉल निर्माण में मक्का के बढ़ते उपयोग से अन्य खपतकर्ता उद्योग पर पड़ेगा असर

29-Apr-2025 05:11 PM

मुम्बई । एथनॉल के उत्पादन में मक्का का उपयोग लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है जिससे अन्य खपतकर्ता उद्योगों और खासकर पशु आहार तथा पॉल्ट्री फीड के साथ-साथ स्टार्च निर्माण उद्योग के पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल (मक्का) प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ सकता है। कुछ समीक्षकों का मानना है कि इससे खाद्य तेल एवं चीनी उद्योग भी प्रभावित हो सकता है।

पॉल्ट्री फीड उद्योग के लिए मक्का को सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता है और देश में उत्पादित मक्का के करीब 60 प्रतिशत भाग की खपत इसी उद्योग में होती है जबकि शेष मक्का का उपयोग पशु आहार, स्टार्च निर्माण एवं लेवरेज आदि में होता है।

मानवीय खाद्य प्रदेश में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है और देश से इसका निर्यात भी होता है। मक्का के घरेलू उत्पादन में खपत के अनुरूप बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। 

उद्योग समीक्षकों के अनुसार एथनॉल निर्माण में मक्का का उपयोग 2022-23 में महज 10 लाख टन हुआ था जो 2023-24 में उछलकर 70 लाख टन पर पहुंच गया। 2024-25 के वित्त वर्ष में यह और भी उछलकर 130 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान है।

मांग में जोरदार बढ़ोत्तरी होने से मक्का के दाम में करीब 20 प्रतिशत का इजाफा हो गया है। वर्ष 2024 में इसका दाम बढ़कर 2600 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया और खपत के पीक सीजन के दौरान एक समय यह 3000 रुपए प्रति क्विंटल के शीर्ष स्तर पर पहुंचा था। इससे पॉल्ट्री उद्योग का लागत खर्च काफी बढ़ गया। 

एथनॉल उत्पादन में मक्का के बढ़ते इस्तेमाल का असर पशु आहार एवं खाद्य तेल उद्योग पर भी देखा जा रहा है। वनस्पति तेल उद्योग को ऑयल मील से काफी आमदनी प्राप्त होती है।

ऑयल मील का उपयोग मुख्यतः पशु आहार, पॉल्ट्री फीड तथा मक्का फीड (मत्स्य आहार) आदि में किया जाता है। लेकिन एथनॉल निर्माण में मक्का का उपयोग बढ़ने से इस प्रक्रिया के तहत जो बाई प्रोडक्ट बनता है

वह डिस्टीलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सोल्यूबल (डीडीजीएस) कहलाता है और खपतकर्ता उद्योगों में ऑयल मील के एक बेहतर विकल्प के रूप में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ने लगा है।

मक्का की ऊंची कीमत के कारण देश से इसका निर्यात प्रभावित होने लगा है जबकि प्रत्यक्ष मानवीय खपत में भी कमी आने लगी है।