एथनॉल उत्पादन में अमरीकी मक्के के उपयोग की सलाह
16-Jun-2025 05:13 PM
नई दिल्ली। हालांकि भारत-अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता के लिए जारी बातचीत के क्रम में अमरीका भारत पर मक्का, सोयाबीन एवं एथनॉल के आयात को खोलने के लिए दबाव डाल रहा है लेकिन भारत सरकार इस पर आसानी से कोई फैसला लेने की स्थिति में नहीं है।
इसका कारण यह है कि अमरीका में मुखयतः जीएम श्रेणी के मक्का एवं सोयाबीन का उत्पादन होता जबकि भारत में इसके उत्पादन, आयात, कारोबार एवं उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा हुआ है।
लेकिन यह पाबंदी केवल खाद्य उद्देश्य एवं पशु आहार / पॉल्ट्री फीड निर्माण तक सिमित है। अखाद्य श्रेणी के औद्योगिक उत्पादों के निर्माण के लिए इसके उपयोग की स्वीकृति देने में सरकार को ज्यादा कठिनाई नहीं होगी।
इसी हकीकत को ध्यान में रखते हुए नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में एथनॉल के उत्पादन में अमरीकी मक्का के उपयोग का सुझाव दिया है।
उसका कहना है कि जीएम मक्का का आयात सिर्फ और सिर्फ एथनॉल निर्माण तक सीमित रखा जाना चाहिए और इसके बाद जो डिस्टीलर्स ड्राईड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स (डीडीजीएस) का निर्माण होगा उसे विदेशों में 100 प्रतिशत निर्यात करने की शर्त होनी चाहिए।
इससे अमरीका से आयातित जीएम मक्का भारतीय खेतों, बाजारों एवं लोगों तक नहीं पहुंचा पाएगा और न ही खाद्य अथवा फीड बाजार के लिए कोई खतरा उत्पन्न कर सकेगा।
भारत सरकार पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथनॉल का अधिक से अधिक उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रही है और मिश्रण का लक्ष्य भी बढ़ा रही है।
इस बढ़ते लक्ष्य को हासिल करने के लिए मक्का की विशाल मात्रा की जरूरत पड़ेगी जबकि देश में उसके अनुरूप इसका उत्पादन नहीं हो रहा है।
अमरीका से एथनॉल निर्माण उद्देश्य के लिए मक्का के आयात की अनुमति देने का कुछ 'साइड इफैक्ट' तो अवश्य होगा लेकिन इससे अमरीका के साथ मोल-भाव करने का अवसर भी मिल जाएगा।
अमरीका तो जीएम सोयाबीन का निर्यात भी भारत में शुरू करना चाहता है मगर इसके आयात की स्वीकृति देना भारत सरकार के लिए आसान नहीं होगा। एथनॉल का आयात करने से भी स्वदेशी उद्योग को नुकसान हो सकता है।
