फ्लैक्स फ्यूल वाहनों पर जीएसटी को युक्ति संगत बनाना आवश्यक
05-Jan-2026 08:12 PM
नई दिल्ली। स्वदेशी चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन- इंडियन शुगर एन्ड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक ने कहा है कि आगामी केन्द्रीय आम बजट में फ्लेक्स फ्यूल से चलने वाले वाहनों पर जीएसटी की दर को युक्तिसंगत बनाने तथा पेट्रोल में एथनॉल की अधिक मात्रा का मिश्रण सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों को सुलझाया जाना चाहिए। महानिदेशक के अनुसार चीनी उद्योग को आगामी बजट से काफी उम्मीदें हैं क्योंकि यह उद्योग फिलहाल अनेक गंभीर समस्याओं और चुनौतियों से जूझ रहा है जिसे सरकार के सहयोग-समर्थन से ही दूर किया जा सकता है।
एसोसिएशन का कहना है कि एथनॉल की घरेलू मांग एवं खपत में बढ़ोत्तरी होना आवश्यक है क्योंकि तभी डिस्टीलरीज का इसका उत्पादन बढ़ाने और अपनी कुल संचित क्षमता का अधिक से अधिक उपयोग करने का अवसर मिल सकता है।
एथनॉल मुक्त पेट्रोल की खपत फ्लैक्स फ्यूल वाहनों में बढ़ सकती है मगर उस पर भारी-भरकम जीएसटी लागू है। अगर उसे युक्त संगत बनाया जाए तो एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की खपत बढ़ जाएगी।
इसके अलावा पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य फिलहाल 20 प्रतिशत ही निर्धारित है जबकि इसे पहले ही हासिल किया जा चुका है। अब सरकार को अच्छी बढ़ोत्तरी के साथ इसका नया लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।
इस्मा के महानिदेशक ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर 5 प्रतिशत का जीएसटी ही लागू है तो फ्लैक्सी फ्यूल वाहनों पर भी इसी दर से जीएसटी लगाया जाना चाहिए जबकि उस पर 18 प्रतिशत का जीएसटी प्रभावी है। छोटे वाहनों पर लगे 18 प्रतिशत के जीएसटी को भी घटाकर 5 प्रतिशत पर लाए जाने की जरूरत है।
इसी तरह एथनॉल मिश्रित ईंधन पर जीएसटी को 18 प्रतिशत के बजाए 5 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में शामिल किए जाने की जरूरत है। एथनॉल निर्माण उद्योग में उद्यमियों द्वारा विशाल पूंजी का निवेश किया गया है मगर इससे उसे समुचित वापसी हासिल नहीं हो रही है।
