फरवरी में कम वर्षा से रबी फसलों के प्रभावित होने की आशंका

03-Feb-2025 06:14 PM

नई दिल्ली । भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक (डीजी) ने कहा है कि फरवरी माह के दौरान सामान्य औसत से कम वर्षा होने की संभावना है जिससे गेहूं, चना एवं सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। ला नीना की स्थिति कमजोर है और यह स्थिति अप्रैल 2025 तक बरकरार रह सकती है।

गेहूं के पौधों में फूल और दाना लगने की प्रक्रिया शुरू हो गई इसलिए उसे ऊंचे तापमान एवं कम बारिश से नुकसान हो सकता है। इसी तरह चना और सरसों की फसल भी नियत समय से पहले ही परिपक्व होने की आशंका है जिससे इसकी उपज दर में गिरावट आने तथा दाने का आकार छोटा रह जाने की संभावना रह सकती है।

इसके अलावा बढ़ती धूप तथा वर्षा की कमी से फलों-सब्जियों एवं अन्य बागवानी फसलों को भी क्षति हो सकती है। 

डीजी के अनुसार प्रतिकूल प्रभाव को न्यूनतम स्तर तक सीमित रखने और फसलों के विकास की निरंतरता को बरकरार रखने के लिए नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ेगी।

लेकिन उत्तर प्रदेश में तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने की उम्मीद है जिससे कृषि फसलों पर शीत लहर का सीमित प्रभाव पड़ने की संभावना है। 

बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी होने से चालू सीजन में गेहूं का उत्पादन बेहतर होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति घट सकती है।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन में 1150 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है जो 2023-24 सीजन के उत्पादन 1132.90 लाख टन से करीब  17 लाख टन ज्यादा है।

आपूर्ति की जटिलता स्थिति के कारण वार्षिक आधार पर गेहूं का भाव 5 प्रतिशत बढ़कर 32.87 रुपए प्रति किलो तथा आटा का दाम भी लगभग इतना ही बढ़कर 37.90 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है

जो रिकॉर्ड स्तर से कुछ ही नीचे है। यदि गेहूं का उत्पादन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा तो बाजार में ज्यादा नरमी का माहौल बनना शायद संभव नहीं होगा।