फरवरी-मार्च का ऊंचा तापमान गेहूं की फसल को कर सकता है प्रभावित
24-Jan-2025 06:10 PM
नई दिल्ली । देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में मौसम की हालत अभी तक अनुकूल बनी हुई है और फसल का सामान्य ढंग से विकास भी हो रहा है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार एवं गुजरात जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों में अच्छी धूप के बावजूद ठंडे मौसम का माहौल होने से गेहूं की फसल पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है और खेतों की मिटटी में नमी का अंश भी मौजूद है। लेकिन असली समस्या फरवरी और मार्च का मौसम पैदा कर सकता है।
दिसम्बर में मौसम विभाग ने कहा था कि जनवरी-मार्च 2025 की तिमाही के दौरान तापमान सामान्य से ऊंचा रहेगा और बारिश कम होगी।
यह समय रबी फसलों की प्रगति की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है और खासकर गेहूं उत्पादन के लिए निर्णायक माना जाता है।
बेशक फिलहाल तापमान में जरूरत से ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है लेकिन धूप तेज होने लगी है। यदि फरवरी तथा मार्च का मौसम गर्म रहा और वर्षा पर आश्रित क्षेत्रों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल गेहूं की औसत उपज दर में गिरावट आ सकती है बल्कि दाने का आकार भी भी छोटा रह सकता है।
पंजाब-हरियाणा में गेहूं की औसत उपज दर सबसे ऊंची रहती है लेकिन इस बार वहां गेहूं की बिजाई नियत आदर्श अवधि के बाद भी होती रही इसलिए उन क्षेत्रों में उत्पादकता घटने की आशंका है।
इसी तरह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में अगले दो महीनों के दौरान तेज गर्मी पड़ने पर गेहूं की फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं का बिजाई क्षेत्र बढ़कर 320 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। सरकार ने 2024-25 के रबी सीजन में गेहूं का उत्पादन लक्ष्य बढ़कर 1150 लाख टन निर्धारित किया है जो एक नया रिकॉर्ड स्तर है।
लेकिन इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खरीद का लक्ष्य 300 लाख टन ही नियत किया है। सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक भी सीमित है।
