गेहूं बाज़ारों का समीकरण
07-Dec-2024 01:56 PM
गेहूं बाज़ारों का समीकरण
इस वर्ष गेहूं के बाजार का समीकरण जटिल और अस्थिर स्थिति में है, और इसका प्रभाव उत्पादन, खपत, स्टॉक, और सरकारी योजनाओं पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। निम्नलिखित बिंदुओं से यह समीकरण समझा जा सकता है:
1. उत्पादन और स्टॉक की स्थिति
-उत्पादन: 2023-24 सीजन में गेहूं का उत्पादन 1,100 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2022-23 सीजन के 1,040 लाख टन से अधिक है। हालांकि, पिछले तीन वर्षों से उत्पादन में गिरावट आई थी, परंतु पिछले वर्ष उत्पादन में मामूली वृद्धि हुई।
- बकाया स्टॉक: इस वर्ष बकाया स्टॉक 195 लाख टन से घटकर 95 लाख टन हो गया है, जो कि स्टॉक की कमी को दर्शाता है। वर्तमान में केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 13 नवंबर 2024 लगभग 217.8 लाख टनथा, जो पिछले साल 218.76 लाख टन से थोड़ा अधिक है।
स्टॉक इस प्रकार रहा
केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक (लाख टन में)
13 नवबर 2024- 217.8
01 नवबर 2024- 222.64
01 नवबर 2023- 218.76
01 नवबर 2022- 210.46
2. खपत और सप्लाई
-खपत : सीजन 2023-24 में गेहूं की खपत 108.65 लाख टन होने का अनुमान है। सीजन 2022-23 में यह आंकड़ा 109 लाख टन था।
-सप्लाई: कुल सप्लाई 1,195.9 लाख टन रहने का अनुमान है, जिसमें उत्पादन, बकाया स्टॉक और सरकारी बिक्री (OMSS और अन्य योजनाओं के तहत) शामिल हैं। इस सप्लाई के बावजूद स्टॉक की कमी और कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है।
3. सरकारी योजनाएं और OMSS
-OMSS बिक्री: सरकार ने 25 लाख टन गेहूं OMSS स्कीम के तहत बिक्री की घोषणा की है, जो मार्च 2025 तक चलेगी। इस बिक्री के तहत गेहूं FAQ रिज़र्व भाव 2,325 और URS गेहूं के 2300 रुपए/ क्विंटल रहे गए। पिछले सप्ताह में हुए टेंडर में 98,700 टन गेहूं की बिक्री की गई, और असम सबसे ऊंची बोली 3,219 रुपये/क्विंटल) में लगी। राज्यों में सबसे ऊँची बोली असम में 3,219 और सबसे कम बोली नोटरः ईस्ट स्टेट्स 2,701 पर की गई।
पंजाब से गेहूं बिक्री के उच्चतम बोली 3,160, मध्य प्रदेश से 2,775, उत्तर प्रदेश 2,931 से दिल्ली से 2,981 और हरियाणा से 3,020 पर टेंडर पास किये गए।
OMSS स्कीम में प्रति बिडर/ सप्ताह 100 मीट्रिक टन रखी गई जिसे उद्योग बहुत कम बता रहा है, अगर बिडिंग मात्रा में कोई बदलाव नहीं किया जाता तो अधिक से अधिक मात्रा में खरीदने के लिए ऊँचे भाव लगा सकता हैं।
ऑनलाइन बिडिंग से बिक्री में पारदर्शिता तो आती है परन्तु इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ जाती हैं, कई बीडेर्स अपना नाम ऊपर रखने के लिए ऊँची बोली भी लगा देता हैं।
ऑनलाइन बिक्री में प्रति कॉल पर बोली 5 रूपये बढ़ जाती है, यानि 1 क्लिक करते ही बोली 5 रूपये बढ़ जाती है।
अगले सप्ताह की लिए भी 1 लाख टन बिक्री टेंडर जारी किया जा रहे हैं।
-स्टॉक लिमिट: मंत्रालय द्वारा 14 सितम्बर को स्टॉक लिमिट घटाई गई, ट्रेडर्स/व्होलेसलेर की लिमिट को 3,000 से घटाकर 2,000 मीट्रिक टन, रेटियलेर और बिग आउटलेट्स पर 10 मीट्रिक टन और मिलर्स/प्रोसेसर्स की लिमिट कुल मिलिंग क्षमता को 70% तो घटाकर 60% किया गया।
स्टॉक लिमिट लगाए जाने के दौरान दिल्ली गेहूं भाव 2,840 रूपये/क्विंटल थे, परन्तु स्टॉक लिमिट लगाए जाने के बाद कीमतें लगातार बढ़ती चली गई।
5 दिसंबर को दिल्ली गेहूं भाव 3,100-3,120 तक पहुंचे परन्तु बुधवार को टेंडर बिक्री के बाद कल 3,050 तक आए। आज यानि 7 दिसंबर को बाजार बिना किसी बदलाव के इन्ही भावों पर खुले।
4. भारत ब्रांड आटा
भारत आटा योजना में जून 2024 तक 27.5 रुपये प्रति किलो की एमआरपी निर्धारित की गई है, और इस योजना के तहत गेहूं का आवंटन भी बढ़ाया गया। 1 अक्टूबर 2023 से जून 2024 तक 15.2 लाख टन आटा बेचा गया।
5. गेहूं आयात
भारत में गेहूं आयात पर 44% शुल्क लगता है, जिससे आयात पड़तल ऊँची रहती है। सरकार ने कई बार आयात खोलने की मांगों को अनदेखा किया।
आयात पर कोई विशेष बदलाव की उम्मीद फिलहाल कम है।
6.बिजाई और मौसम का असर
- बिजाई: इस वर्ष गेहूं की बिजाई 200 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जो पिछले सीजन से 12.38 लाख हेक्टेयर अधिक है। हालांकि, इस दौरान कुछ राज्यों में कीटों का हमला हुआ है, जिससे किसानों ने पुनः बिजाई की।
-मौसम: इस समय तापमान औसतन अधिक है और गेहूं उत्पादक राज्यों में अब तक कोई बारिश नहीं हुई है। अगर अगले सप्ताह तक तापमान नहीं गिरा, तो पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है, जो अंततः उत्पादकता को घटा सकता है।
7. बाजार का भविष्य
यदि मौसम में कोई अप्रत्याशित बदलाव नहीं आता, तो गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, सप्लाई और डिमांड का संतुलन बनाए रखने के लिए, स्टॉक की स्थिति को देखते हुए कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी। आई-ग्रेन इंडिया का मानना है कि कीमतें एक स्तर पर टिकने के बाद फिर से बढ़ सकती हैं, जब नई फसल बाजार में आएगी।
निष्कर्ष: गेहूं का बाजार इस समय अस्थिर है, जहां उत्पादन और सप्लाई की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। स्टॉक की कमी, बढ़ती कीमतें और सरकारी बिक्री योजनाओं के कारण बाजार में असमंजस की स्थिति है। आने वाले महीनों में मौसम और सरकारी फैसलों के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी।
