गेहूं के बजाए आटा का निर्यात खोलने पर हो सकता है विचार
15-Jul-2025 03:58 PM
नई दिल्ली। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने संकेत दिया है कि रिकॉर्ड उत्पादन एवं अधिशेष स्टॉक के बावजूद गेहूं के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को निकट भविष्य में हटाए जाने की संभावना नहीं है और इसके बजाए जरूरत के अनुरूप आटा का निर्यात खोलने पर विचार किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि घरेलू बाजार मूल्य में भारी तेजी आने के बाद सरकार ने वर्ष 2022 के मई माह में गेहूं तथा अगस्त माह में गेहूं के मूल्य संवर्धित उत्पादों- आटा, मैदा, सूजी एवं चोकर (ब्रान) के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था और यह पाबंदी अब भी लागू है।
घरेलू प्रभाग में गेहूं एवं उसके उत्पादों की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार को इस तरह निर्णय लेना पड़ा था।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार निर्यात खोलने से पूर्व सरकार गेहूं की घरेलू मांग एवं आपूर्ति की स्थिति का गहन अध्ययन- विश्लेषण करेगी और उसके आधार पर आवश्यक निर्णय लेगी। लेकिन इतना अवश्य है कि निकट भविष्य में गेहूं के व्यापारिक निर्यात की अनुमति दिए जाने की संभावना नहीं है।
आपूर्ति एवं उपलब्धता की सुगम स्थिति होने तथा कीमतों में स्थिरता आने के बाद अधिक से अधिक आटा के निर्यात की स्वीकृति देने पर विचार किया जा सकता है। गेहूं एवं इसके उत्पादों की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति चावल की भांति सुगम नहीं है।
केन्द्रीय पूल में चावल का विशाल भंडार मौजूद है और घरेलू बाजार में भी इसका कोई अभाव नहीं है। दूसरी ओर गेहूं का स्टॉक मांग एवं जरूरत से कुछ ही अधिक है।
केन्द्र सरकार ने गेहूं का घरेलू उत्पादन 2024-25 के रबी सीजन में तेजी से उछलकर 1170 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।
हालांकि गेहूं की सरकारी खरीद पिछले साल के 266 लाख टन से बढ़कर इस बार 301 लाख टन पर पहुंची मगर फिर भी 333 लाख टन के नियत लक्ष्य से पीछे रह गई। सरकार के लिए गेहूं के बजाए आटा का निर्यात खोलना बेहतर विकल्प होगा।
