गेहूं की सरकारी खरीद 46 प्रतिशत बढ़कर 200 लाख टन के करीब पहुंची
26-Apr-2025 10:44 AM
नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद में इस बार शानदार बढ़ोत्तरी हो रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रबी मार्केटिंग सीजन में 24 अप्रैल 2025 तक गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर 198.60 लाख टन पर पहुंच गई जो पिछले साल की समान अवधि की खरीद 135.80 लाख टन से 46 प्रतिशत या करीब 63 लाख टन ज्यादा है।
पंजाब तथा हरियाणा की मंडियों में खरीदे गए गेहूं का अम्बार लगा हुआ है। इसका तेजी से उठाव नहीं होने के कारण वहां खरीद की गति कुछ धीमी पड़ गई है। मंडियों में गेहूं का सूखा माल आ रहा है इसलिए एजेंसियों को किसानों से उसकी खरीद करने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
24 अप्रैल 2025 को 1.47 लाख टन गेहूं खरीदा गया जो 24 अप्रैल 2024 की खरीद 1.67 लाख टन से 11.5 प्रतिशत कम रहा। इससे पूर्व 21 अप्रैल को 148 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी जो गत वर्ष की इसी अवधि की मात्रा 130 लाख टन से 14.01 प्रतिशत अधिक रही थी।
इससे संकेत मिलता है कि खरीद की गति कुछ धीमी पड़ गई है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गेहूं की दैनिक खरीद में कमी नहीं आई है बल्कि पिछले साल देर से फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हुई थी इसलिए अप्रैल के दूसरे सप्ताह से मंडियों में इसकी आवक तेजी से बढ़ने लगी थी।
वैसे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि पिछले 8-10 दिनों से गेहूं की व्यापारिक खरीद में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद में फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों / स्टॉकिस्टों की सक्रियता ज्यादा देखी जा रही है।
नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद गत वर्ष के 45.80 लाख टन से उछलकर इस बार 68.40 लाख टन पर पहुंच गई।
हालांकि वहां खरीद की प्रक्रिया कुछ देर से आरंभ हुई मगर फिर भी इसकी मात्रा अन्य राज्यों से ऊपर पहुंच गई। हरियाणा में गेहूं की खरीद बढ़कर 58.90 लाख टन पर पहुंची जो पिछले साल की मात्रा 51.90 लाख टन से 7 लाख टन अधिक है।
केन्द्रीय पूल में गेहूं का योगदान इन दोनों राज्यों से सबसे ज्यादा प्राप्त होने की उम्मीद है। इसके अलावा मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में भी गेहूं की अच्छी खरीद हो रही है लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार एवं गुजरात में खरीद में वृद्धि कम देखी जा रही है।
खाद्य मंत्रालय ने इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर 312.70 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है और उसे इसके हासिल हो जाने का भरोसा है।
