गेहूं की व्यापारिक खरीद में सुधार के संकेत

25-Apr-2025 07:56 PM

नई दिल्ली। पिछले साल गेहूं का थोक मंडी भाव काफी ऊंचा रहा था और उत्पादकों तथा स्टॉकिस्टों के पास माल का समुचित भंडार नहीं था इसलिए सरकार द्वारा भंडारण सीमा का आदेश लागू किए जाने के बावजूद न तो बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता में अपेक्षित बढ़ोत्तरी हो सकी और न ही कीमतों में नरमी आ सकी। इस वर्ष मार्च-अप्रैल में जब नए माल की आपूर्ति बढ़ने लगी तब कीमतों पर दबाव पड़ना शुरू हो गया। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने इस वर्ष गेहूं का घरेलू उत्पादन उछलकर 1154.70 लाख टन के सर्वकालीन  सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जबकि उद्योग- व्यापार क्षेत्र का मानना है कि वास्तविक उत्पादन अधिक से अधिक 1100 लाख टन तक हो सकता है।

यह उत्पादन आंकड़ा भी छोटा नहीं है। इससे प्रतीत होता है कि आगामी महीनों के दौरान घरेलू प्रभाग में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रह सकती है

और ऑफ सीजन के दौरान इसकी कीमतों में सीमित इजाफा ही हो सकता है। इसका कारण यह है कि इस बार सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ व्यापारियों एवं फ्लोर मिलर्स द्वारा भी गेहूं की अच्छी खरीद की जा रही है। 

केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद इस बार 184 लाख टन से ऊपर पहुंच चुकी है जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है। मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में किसानों को अतिरिक्त बोनस मिल रहा है लेकिन अन्य राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही संतोष करना पड़ रहा है। बिहार में गेहूं का भाव ऊंचा है इसलिए वहां सरकारी खरीद ज्यादा नहीं बढ़ेगी।

पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी व्यापारी / मिलर्स गेहूं की अच्छी खरीद कर रहे हैं। केन्द्रीय पूल में सर्वाधिक योगदान देने वाले सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों- पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में पिछले साल के मुकाबले इस बार गेहूं की ज्यादा खरीद हुई है।

गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 2425 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित हुआ है जबकि मिलर्स एवं व्यापारी इससे कुछ ऊंचे दाम पर इसकी खरीद कर रहे हैं।