गेहूं उद्योग के लिए सरकारी नीति में बदलाव की जरूरत
11-Nov-2025 04:04 PM
चंडीगढ़। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ- इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया ने WPPS द्वारा चंडीगढ़ में आयोजित समिट में कहा कि गेहूं उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के लिए सरकार को उदारवादी नीति बनानी चाहिए ताकि इसके कारोबार में निर्बाधता निरन्तर बनी रहे।
भारत गेहूं के उत्पादन में आत्मनिर्भर बना हुआ है जिसमें पंजाब की अहम भूमिका है। सरकार को ऐसी व्यवस्था लागू करनी चाहिए जिससे बाजार का विश्वास सुनिश्चित हो सके और एक स्थायी एवं ज्ञात नीति का वातावरण बन सके।
उद्योग व्यापार क्षेत्र को किसी भी सरकारी नीति के निर्यात एव क्रियान्वयन से पूर्व भरोसे में लिया जाना जरुरी है ताकि उसे पहले से पता हो कि आगे क्या होने वाला है।
अध्यक्ष महोदय ने सरकार से गेहूं पर लगी भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) को तत्काल कायम होने का जोरदार आग्रह किया है।
उनका कहना है कि यदि सरकार को गेहूं के बारे में जानकारी प्राप्त करना जरुरी हो तो वह मासिक आधार पर स्टॉक की घोषणा का नियम बरकरार रख सकती है लेकिन गेहूं की खरीद बिक्री तथा इसके स्टॉक भंडारण पर कोई अंकुश नहीं लगाया जाना चाहिए।
गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार को ऐसी नीति लागू करनी चाहिए जिससे एक तरफ घरेलू उत्पादन में बढ़ोत्तरी सुनिश्चित हो और दूसरी ओर मिलिंग-प्रोसेसिंग उद्योग को भी सहयोग-समर्थन हासिल हो सके।
बाजार को अपने कारोबार की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए मगर गेहूं की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव बरकरार रहना चाहिए।
