गुजरात एवं महाराष्ट्र में कपास के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट

13-Aug-2025 08:21 PM

नई दिल्ली। पिछले साल के मुकाबले मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान कपास के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की जा रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर इसका बिजाई क्षेत्र घटकर 106.96 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया है जो गत वर्ष के क्षेत्रफल 110.49 लाख हेक्टेयर से 3.53 लाख हेक्टेयर कम है।

इस बार कपास का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 129.50 लाख हेक्टेयर आंका गया है जिसके मुकाबले इसका वास्तविक रकबा बहुत पीछे है। अधिकांश क्षेत्रों में कपास की बिजाई पूरी हो चुकी है। 

देश के दोनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- गुजरात और महाराष्ट्र में कपास के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट आई है क्योंकि वहां अनेक परम्परागत उत्पादक अन्य फसलों की तरफ आकर्षित हो गए।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस बार कपास का उत्पादन क्षेत्र गुजरात में 23.47 लाख हेक्टेयर से 2.89 लाख हेक्टेयर घटकर 20.59 लाख हेक्टेयर तथा महाराष्ट्र में 40.82 लाख हेक्टेयर से 2.43 लाख हेक्टेयर गिरकर 38.39 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया। 

दूसरी ओर कपास का बिजाई क्षेत्र तीसरे सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- तेलंगाना में 41.37 लाख एकड़ से उछलकर 43.71 लाख एकड़, कर्नाटक में 6.40 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 7.49 लाख हेक्टेयर तथा राजस्थान में 5.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.29 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर आंध्र प्रदेश में 2.90 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.36 लाख हेक्टेयर रह गया। हरियाणा में भी रकबा घटने की सूचना है। उपरोक्त आंकड़े विभिन्न तिथियों के हैं। 

हालांकि केन्द्र सरकार ने किसानों को अधिक से अधिक क्षेत्रफल में खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 589 रुपए प्रति क्विंटल का भारी इजाफा कर दिया

जिससे मध्यम रेशे वाली श्रेणी का समर्थन मूल्य 7121 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 7710 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली किस्मों का एमएसपी 7521 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 8110 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया

लेकिन फिर भी कुछ राज्यों के किसान इससे प्रभावित नहीं हुए और उन्होंने कपास का रकबा घटा दिया। पिछले साल भी इसके क्षेत्रफल में काफी गिरावट आई थी।