गुजरात में खरीफ फसलों का क्षेत्रफल गत वर्ष से 4 लाख हेक्टेयर पीछे

15-Jul-2025 01:43 PM

अहमदाबाद। पश्चिमी भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- गुजरात में मानसून की बारिश अनियमित एवं अनिश्चित तथा असमान हो रही है जिससे खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार कुछ धीमी देखी जा रही है।

हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस बार दलहन-तिलहन फसलों का रकबा कुछ आगे है मगर धान, मोटे अनाज तथा कपास का क्षेत्रफल पीछे होने से 14 जुलाई 2025 तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र घटकर 50.27 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 54.31 लाख हेक्टेयर से 4.04 लाख हेक्टेयर कम है।

राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार गुजरात में पिछले साल की तुलना में वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान धान सहित मोटे अनाजों का उत्पादन क्षेत्र 5.26 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.84 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। इसके तहत धान का क्षेत्रफल 1.85 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.34 लाख हेक्टेयर, बाजरा का बिजाई क्षेत्र 1.00 लाख हेक्टेयर से गिरकर 89 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 2.27 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.60 लाख हेक्टेयर रह गया। ज्वार की बिजाई भी कम हुई है। 

दलहनों की बिजाई 1.70 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 1.34 लाख हेक्टेयर पर अटक गई। इसके तहत अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र 1.23 लाख हेक्टेयर से घटकर 81 हजार हेक्टेयर तथा उड़द का रकबा 28 हजार हेक्टेयर से गिरकर 25 हजार हेक्टेयर रह गया लेकिन मूंग का उत्पादन क्षेत्र 17 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 25 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। 

तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 20.01 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 20.79 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसके तहत मूंगफली का बिजाई क्षेत्र तो 17.23 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 18.51 लाख हेक्टेयर, तिल का बिजाई क्षेत्र 16 हजार हेक्टेयर सुधरकर 19 हजार हेक्टेयर तथा अरंडी का रकबा 6 हजार हेक्टेयर से उछलकर 19 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया लेकिन सोयाबीन का क्षेत्रफल 2.56 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.90 लाख हेक्टेयर रह गया। 

इसके अलावा गुजरात में कपास का उत्पादन क्षेत्र भी पिछले साल के 20.99 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 18.57 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया मगर ज्वार का रकबा 15 हजार हेक्टेयर से उछलकर 28  हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि गुजरात देश में कपास, मूंगफली एवं अरंडी का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है।