गन्ना नियंत्रण आदेश में संशोधन के प्रस्ताव से पश्चिमी यूपी में उबाल

18-May-2026 08:20 PM

मेरठ। केन्द्र सरकार द्वारा गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में संशोधन का जो प्रस्ताव रखा गया है उससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उबाल आ गया है। इस प्रस्तावित संशोधन के कुछ प्रावधानों से गन्ना उत्पादक असंतुष्ट और नाराज हैं क्योंकि इससे उनके हितों को नुकसान की आशंका है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश भारत में गन्ना का सबसे प्रमुख तथा चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है जहां गुड़, खांडसारी का निर्माण भी बड़े पैमाने पर होता है। 

ध्यान देने की बात है कि महाराष्ट्र की भांति उत्तर प्रदेश में भी गन्ना को राजनैतिक दृष्टिकोण से अत्यन्त संवेदनशील कृषि उत्पाद (फसल) माना जाता है। अगले साल वहां राज्य विधानसभा का चुनाव होने वाला है और उससे पूर्व इस तरह का प्रस्ताव आना सत्तारूढ़ दल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश के 10-12 प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में गुड़-खांडसारी का सर्वाधिक उत्पादन होता है।

वहां इसकी अधिकांश इकाइयां भी स्थापित हैं जो प्रति वर्ष क्रियाशील रहती है। अनेक इकाइयां स्थानीय स्तर पर ज्ञात कोल्हू क्लस्टर के माध्यम से संचालित होती है। नए प्रावधान में इन इकाइयों के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने का अनिवार्य नियम बनाने का प्रस्ताव है। संशोधन का प्रारूप पिछले महीने जारी किया गया था और 20 मई तक इस पर अपनी राय-टिप्पणी दी जा सकती है।