घरेलू उत्पादन घटने से रूई के आयात में भारी वृद्धि का अनुमान

12-Nov-2025 11:48 AM

मुम्बई। घरेलू उत्पादन घटकर पिछले 17 वर्षों के निचले स्तर पर अटकने तथा सरकार द्वारा सीमा शुल्क को स्थगित किए जाने से भारत में रूई का आयात तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

मालूम हो कि चीन के बाद भारत दुनिया में रूई का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। भारत में आयात बढ़ने से वैश्विक बाजार में रूई का भाव सुधरने के आसार हैं जो फिलहाल छह माह के निचले स्तर पर चल रहा है। 

एक अग्रणी व्यापारिक संगठन- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष का कहना है कि 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान देश में रूई का आयात करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 45 लाख गांठ के आसपास पहुंचने की उम्मीद है।

इसमें से लगभग 30 लाख गांठ का आयात अक्टूबर-सितम्बर 2025 की मौजूदा तिमाही में हो सकता है। ध्यान देने की बात है कि सरकार ने 31 दिसम्बर 2025 तक रूई के आयात को शुल्क मुक्त कर दिया है।

संगठन के अनुसार 2024-25 के मार्केटिंग सीजन एक दौरान देश में रूई का आयात तेजी से उछलकर 41 लाख गांठ पर पहुंच गया जो हाल के वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर रहा। भारत में रूई का आयात मुख्यतः अमरीका, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया एवं अफ्रीका से किया जाता है।

एसोसिएशन के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में फिलहाल रूई काफी सस्ते दाम पर उपलब्ध है जिससे टेक्सटाइल मिलें इसके आयात में जबरदस्त सक्रियता दिखा रही है।

31 दिसम्बर 2025 से पहले ही टेक्सटाइल मिलें अधिक से अधिक मात्रा में रूई का आयात सुनिश्चित कर लेना चाहती है।