हल्दी के उत्पादन में 15-20 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान
23-Dec-2025 05:58 PM
मुम्बई। अक्टूबर में बेमौसमी तूफानी वर्षा होने तथा खेतों में पानी जमा हो जाने से हल्दी की फसल को दक्षिणी राज्यों में भारी क्षति हुई और उसके बाद फसल पर कीड़ों-रोगों का प्रकोप भी बन गया। उससे हल्दी की उपज दर एवं पैदावार के साथ-साथ क्वालिटी भी प्रभावित होने की आशंका है।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक प्राकृतिक आपदाओं एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप से करीब 15-20 प्रतिशत हल्दी की फसल क्षतिग्रस्त हो गई और क्वालिटी की समस्या उत्पन्न होने की संभावना है जिससे निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। उधर उत्पादकों एवं स्टॉकिस्टों के पास हल्दी का पिछला बकाया स्टॉक भी घट गया है
जिससे इसकी कीमतों को समर्थन मिल रहा है। एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार वर्ष 2024 में करीब 20-22 लाख बोरी हल्दी का बकाया स्टॉक मौजूद था जो वर्तमान समय में घटकर 15 लाख बोरी के आसपास रह गया है।
समीक्षकों के मुताबिक आपूर्ति एवं उपलब्धता की जटिल स्थिति को देखते हुए हल्दी का भाव मजबूत हो गया है जबकि जनवरी के प्रथम पखवाड़े के दौरान इसमें 500-700 रुपए प्रति क्विंटल का और इजाफा हो सकता है।
यदि घरेलू एवं वैश्विक निर्यात मांग बेहतर रही तो हल्दी की कीमतों को कुछ अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। उसके बाद नए माल की जोरदार आपूर्ति शुरू होने पर हल्दी बाजार में स्थिरता या नरमी का माहौल बन सकता है।
जनवरी के अंत तक अन्य माल की आवक एक दबाव बढ़ने पर हल्दी की कीमतों में अगर 500 से 1000 रुपए प्रति क्विंटल तक की नरमी आ जाये तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी।
शुरूआती चरण में हल्दी के नए माल की आवक निजामाबाद मंडी में आरंभ होने की परिपाटी रही है जो जनवरी में शुरू हो जाती है। इरोड तथा महाराष्ट्र की कुछ मंडियों में फरवरी-मार्च से नई हल्दी आने लगती है।
इसे देखते हुए जनवरी में हल्दी के दाम में सीमित गिरावट आएगी लेकिन फरवरी-मार्च में इसका वायदा भाव गिरकर 15500-15700 रुपए प्रति क्विंटल के बीच आ जाने की संभावना है। कीमतों के परिदृश्य की तस्वीर फरवरी में ही स्पष्ट हो जाएगी। ऊंचे दाम पर हल्दी की मांग आंशिक रूप से प्रभावित हो सकती है।
