हरियाणा में गन्ना का उत्पादन घटने से चीनी मिलों की बढ़ेगी परेशानी
22-Nov-2024 11:28 AM
यमुनानगर । हरियाणा में गन्ना का बिजाई क्षेत्र 2023-24 सीजन के करीब 3.60 लाख एकड़ की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान लगभग 56 हजार एकड़ या 15 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 3.04 लाख एकड़ पर सिमट गया।
इसके फलस्वरूप गन्ना के उत्पादन में भारी गिरावट आने की संभावना है जिससे चीनी मिलों को कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में हासिल होना मुश्किल लगता है। उद्योग समीक्षकों के अनुसार गन्ना की कमी से राज्य में चीनी का उत्पादन घटने की संभावना है।
हरियाणा में कुल 14 चीनी मिलें हैं जिसमें सहकारी क्षेत्र की इकाइयां भी शामिल हैं। ये चीनी मिलें पानीपत, रोहतक, करनाल, सोनीपत, शाहबाद, जींद, पलवल, मेहम, कैथल, गोहाना एवं असंध (हैफेड मिल) में अवस्थित हैं जो सहकारी क्षेत्र की है। इसके अतिरिक्त नारायण गढ़ (अम्बाला जिला), भादसो (करनाल जिला) तथा यमुना नगर में प्राइवेट चीनी मिलें हैं।
उपरोक्त चीनी मिलों में से कई इकाइयों में गन्ना की क्रशिंग आरंभ हो चुकी है जिसमें यमुना नगर एवं करनाल के प्लांट भी शामिल हैं। हरियाणा में अनेक कारणों से इस बार गन्ना के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आई है।
एक तो वहां मौसमी कारणों एवं कीड़ों के प्रकोप से गन्ना की उपज दर लगातार घटती जा रही है। शाहबाद, नारायण गढ़ तथा यमुना नगर में भारी वर्षा एवं बाढ़ से बिजाई क्षेत्र प्रभावित हुआ।
इसके अलावा वहां श्रमिकों का भी अभाव देखा जा रहा है। गन्ना फसल की कटाई में पिछले साल भारी कठिनाई हुई थी जिसे देखते हुए कुछ क्षेत्रों में किसानों ने इसकी खेती ही बंद कर दी।
इन क्षेत्रों में गन्ना के किसान मुख्यत: दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अब बिहार, उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल जैसे प्रांतों से श्रमिक कम आ रहे हैं और मजदूरी भी ज्यादा मांगते हैं। इसके अलावा धान तथा गेहूं से ज्यादा आमदनी होती है। गन्ना की कटाई के लिए मशीनों का बहुत कम उपयोग हो रहा है।
