हरियाणा में ऊंचे तापमान से गेहूं की पैदावार एवं क्वालिटी प्रभावित होने की आशंका
28-Jan-2025 11:44 AM
चंडीगढ़ । केन्द्रीय पूल में गेहूं का योगदान देने वाले एक अग्रणी राज्य- हरियाणा में बढ़ते तापमान से फसल को नुकसान होने की आशंका है। इस राज्य में चालू रबी सीजन के दौरान करीब 37 लाख एकड़ में गेहूं की खेती हुई और कुछ समय पूर्व तक फसल की हालत अच्छी बनी हुई थी मगर पिछले कुछ दिनों में तापमान में अचानक हुई वृद्धि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
ठंड की कमी तथा धूप में वृद्धि के कारण गेहूं की अगैती बिजाई वाली फसल नियत समय से पूर्व ही पकने लगी है। इससे दाने का आकार छोटा रहने की संभावना है क्योंकि उसका पूर्ण विकास नहीं हो पाएगा।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सर्दियों की बिजाई नियत समय से पहले ही होने तथा तापमान के ऊंचा रहने से गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है।
गेहूं की बालियां सुनहरी होने लगी हैं और यदि धूप की तीव्रता बढ़ती रही तथा तापमान में गिरावट नहीं आई तो कई क्षेत्रों में गेहूं के उत्पादन में 10-20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
इसके साथ-साथ दाने के साइज छोटा रहने से उसकी क्वालिटी भी अपेक्षित स्तर की नहीं रहेगी और उसमें प्रोटीन का अंश घट सकता है।
हरियाणा में फिलहाल एक अच्छी बारिश एक ठंडे मौसम की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। बढ़ते तापमान से खेतों की मिटटी में नमी का अंश घटने लगा है और गेहूं की फसल को जमीन से आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।
हरियाणा में दिन तथा रात के तापमान में भारी अंतर देखा जा रहा है। दिन में तेज धूप रहती है मगर रात में मौसम ठंडा हो जाता है। दोनों के बीच 10-15 डिग्री सेल्सियस का फैसला रहना गेहूं की फसल के लिए शुभ नहीं है।
हरियाणा में गेहूं की पैदावार एवं क्वालिटी प्रभावित होने पर केन्द्रीय पूल के लिए होने वाली खरीद पर असर पड़ सकता है। खाद्य मंत्रालय को गेहूं की प्राप्ति के लिए पंजाब-हरियाणा से काफी उम्मीदें रहती हैं।
वैसे भी गेहूं का बाजार भाव फिलहाल सरकार समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है। हरियाणा में आमतौर पर मार्च के अंतिम सप्ताह में गेहूं फसल की कटाई-तैयारी एवं सरकारी खरीद आरंभ होती है लेकिन इस बार कुछ क्षेत्रों में फसल जल्दी आ सकती है।
