इंडोनेशिया में आयात घटने से चावल का वैश्विक भाव नरम

08-Jan-2026 03:27 PM

कारावांग। दक्षिण-पूर्वी एशिया में अवस्थित देश- इंडोनेशिया अब चावल उत्पादन के मामले में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है और इसलिए वहां विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता बहुत घट गई है। इंडोनेशिया के कृषि मंत्री का कहना है कि आयात में जबरदस्त कटौती होने के कारण चावल के वैश्विक बाजार मूल्य में शीर्ष स्तर के मुकाबले करीब 44 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आ गई है।

चावल का अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव पहले 650 डॉलर प्रति टन की उंचाई पर पहुंच गया था जो अब घटकर 340 डॉलर प्रति टन के आसपास रह गया है।

वैसे इंडोनेशियाई मंत्री का यह दावा आंशिक रूप से हो सकता है। वास्तविक कारण यह है कि जब दुनिया में सबसे प्रमुख निर्यातक देश भारत में चावल के निर्यात पर प्रतिबंध, मात्रात्मक नियंत्रण एवं ऊंचा शुल्क लागू हुआ था तब वैश्विक बाजार में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की आपूर्ति एवं उपलब्धता बुरी तरह प्रभावित हुई थी

और कीमतों में सरपट तेजी आ गई थी। बाद में भारत सरकार द्वारा चावल के निर्यात को सभी शुल्कों एवं नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया जिससे कीमतों में नरमी का माहौल बन गया। 

कृषि मंत्री के अनुसार चावल के आयात को रोकने के इंडोनेशिया सरकार के निर्णय से वैश्विक बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता काफी बढ़ गई और प्रमुख निर्यातक देशों के पास इसका भारी-भरकम अधिशेष स्टॉक बच गया। इंडोनेशिया की सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए ठोस नीति बनाई है जिसका सार्थक परिणाम अब सामने आ रहा है। 

यह सही है कि कुछ वर्ष पूर्व तक इंडोनेशिया चावल का एक अग्रणी आयातक देश बना हुआ था लेकिन अब वह इसके उत्पादन में धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनता जा रहा है आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चालू वर्ष (2026) के आरंभ में वहां चावल का स्टॉक बढ़कर 32.50 लाख टन पर पहुंच गया।

यह अब तक का सबसे ऊंचा शुरुआती स्टॉक माना जा रहा है। इससे पूर्व किसी भी वर्ष में जनवरी के दौरान इंडोनेशिया से चावल का स्टॉक 30 लाख टन से ऊपर नहीं पहुंचा था। कृषि मंत्री के मुताबिक फिलहाल इंडोनेशिया में चावल का आयात नहीं हो रहा है।