ईरान-इजरायल युद्ध में सामुद्रिक परिवहन खर्च एक बार फिर बढ़ने की आशंका
16-Jun-2025 04:18 PM
मुम्बई। ईरान तथा इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक व्यापार का परिदृश्य बदलने की संभावना है। पश्चिम एशिया में जारी यह लड़ाई अगर लम्बे समय तक बरकरार रही तो कृषि एवं खाद्य उत्पाद सहित अन्य सामानों का वैश्विक कारोबार निश्चित रूप से प्रभावित होगा।
ईरान ने होरमुज जलडमरू मध्य को बंद करने की चेतावनी दी है जबकि दुनिया में 25 प्रतिशत पेट्रोलियम का आयात-निर्यात इसी मार्ग से होता है।
इस युद्ध का भारत पर जो तात्कालिक असर पड़ेगा वह सामुद्रिक परिवहन खर्च एवं बीमा व्यय में वृद्धि के रूप में सामने आएगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्टर्स आर्गेनाइजेशन (फियो) के महानिदेशक का कहना है कि लाल सागर क्षेत्र से यातायात धीरे-धीरे सामान्य होता जा रहा है और शिपमेंट तथा बीमा खर्च भी काफी हद तक स्थिर हो गया है
मगर अब हालात बदल जायेंगे। कार्गो शिप धीरे-धीरे लाल सागर के जल मार्ग पर वापस लौट रहे हैं जिससे यात्रा में 15-20 दिनों की बचत हो रही है। भारत तथा एशिया के अन्य देशों से अमरीका और यूरोप की ओर जाने वाले जहाजों को इससे काफी राहत मिल रही है।
लेकिन ईरान-इजरायल युद्ध के कारण यमन के हूती विद्रोही गुट पुनः सक्रिय हो गया है। वे न केवल इजरायल पर मिसाइलों से हमले कर रहे हैं बल्कि लाल सागर क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को भी निशाना बना सकते हैं।
इसके फलस्वरूप जहाज लाल सागर तथा स्वेज नहर के जल मार्ग से जाना पसंद नहीं करेंगे और इसलिए उसे अफ्रीका के बाहरी भाग से लम्बा सफर तय करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ेगा। स्वाभाविक रूप से इससे समय और खर्च बढ़ जाएगा।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन कौंसिल के चेयरमैन का कहना है कि लाल सागर का जल मार्ग एक बार फिर बंद हो सकता है। हालांकि शिपिंग कंपनियों द्वारा फिलहाल परिवहन खर्च में संशोधन के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
इसलिए भारतीय निर्यातक कुछ हद तक राहत महसूस कर रहे हैं मगर आगामी सप्ताहों में स्थिति बदल सकती है।
