ईरान में अशांति से बासमती चावल का निर्यात प्रभावित - कीमतों में गिरावट

14-Jan-2026 01:25 PM

नई दिल्ली। भारतीय बासमती चावल के एक महत्वपूर्ण आयातक देश - ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट तथा नागरिक अशांति के दौर से गुजर रहा है। उसकी मुद्रा रियाल का जबरदस्त अवमूल्यन हो चुका है। भारतीय रुपया अब 12 हजार रियाल के बराबर हो गया है। डॉलर की कमी के कारण ईरान के आयातकों की क्रय शक्ति क्षीण पड़ गयी है और भुगतान का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इसके फलस्वरूप भारत से ईरान को प्रीमियम क्वालिटी के बासमती चावल का निर्यात लगभग बंद हो गया है। ईरान पर अमरीका और इजरायल के हमले का खतरा भी बना हुआ है। लाखों लोग ईरान की सड़कों पर विद्रोह तथा प्रदर्शन कर रहे हैं।

ईरान में निर्यात ठप्प होने से घरेलू प्रभाग में बासमती चावल और धान के दाम में भारी गिरावट देखी जा रही है। ईरान की हालत अनिश्चित बनी हुई है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईरेफ) से ईरान को चावल भेजने वाले निर्यातकों से पुराने अनुबंधों पर उत्पन्न जोखिम की दोबारा समीक्षा करने और सुरक्षित भुगतान मैकेनिज्म को अपनाने का आग्रह किया है। फेडरेशन ने आग्रह किया है कि ईरान को जल्दबाजी में बासमती चावल का निर्यात काफी जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है और इसलिए उसको शिपमेंट के लिए चावल का विशाल स्टॉक बनाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उपलब्ध आकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के शुरूआती आठ महीनों में यानी अप्रैल-नवम्बर 2025 के दौरान भारत से ईरान को 46.81 करोड़ डॉलर मूल्य के 5.99 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ।

ईरान भारतीय बासमती चावल के शीर्ष आयातक देशों में शामिल रहा है लेकिन चालू वित्त वर्ष के दौरान उसकी मांग कमजोर देखी जा रही है। एक तरफ भुगतान संकट का मामला है तो दूसरी ओर निर्यात शिपमेंट की चुनौतियां भी मौजूद हैं। घरेलू मंडियों पर इसका स्पष्ट प्रभाव पड़ने लगा है। पिछले 8-10 दिनों के अन्दर विभिन्न किस्मों के बासमती धान की कीमतों में भारी गिरावट आ गयी है क्योंकि प्रोसेसर्स एवं निर्यातक इसकी खरीद से हिचकने लगे हैं। 1121 बासमती चावल का औसत मूल्य 85 रुपए से घटकर 80 रुपए प्रति किलो तथा 1509 एवं 1718 का दाम 70 रुपए से गिरकर 65 रुपए प्रीत किलो पर आ गया है।