IPGA की सातवी पल्सेस कॉन्क्लेव 2025 के मुख्य अंश

13-Feb-2025 11:52 AM

IPGA की सातवी पल्सेस कॉन्क्लेव 2025 के मुख्य अंश
प्रहलाद जोशी, मिनिस्टर ऑफ़ कंज्यूमर अफेयर्स के अनुसार
★ IPGA द्वारा इस बार पल्सेस कॉन्क्लेव 2025 की थीम पल्सेस फॉर प्रोस्पेरिटी पर निर्धारित।
★ प्रोटीन के मामले में दलहन एक अहम् भूमिका निभाती है।
★ प्रधामंत्री ने नेशनल फ़ूड सिक्यूरिटी के तहत अधिक से अधिक मात्रा में प्रोटीन/न्यूट्रीशन देने की बात कही।
★ PDS के तहत चावल, गेहूं एवं अन्य अनाजों को नागरिकों तक पहुँचाया जाता है।
★ भारत में दलहनों की खपत 280-290 लाख टन रहती है। 20-30 लाख टन आयात कर खपत को पूरा किया जाता है।
★ 10 साल पहले दलहन उत्पादन 117 लाख टन था, 2024 में यह बढ़कर 25-260 लाख टन पहुंचा। जिसमें चना की मात्रा 45-46%, तुवर की 14-15%, मूंग की 13%, उड़द की 9.5%, मसूर की 6.5% व अन्य दलहनों की 10-11% है।
★ अलनीनो के कारण 2024 में दलहन उत्पादन में गिरावट आई और भाव बढ़े। सरकार ने हस्तक्षेप कर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की।
★ देश में 555 सेंटरों से प्राइस मोनिटरिंग की जाती है। पिछले 2 वर्षों में खाद्यान्न महंगाई 2 साल के निम्न स्तर पर। PM आशा के तहत 35000 करोड़ रुपए का बजट 2025-26 में आवंटन किया गया। इसमें PSS व PSF शामिल है।
★ 2024-25 सीजन के लिए सरकार ने तुवर, उड़द, मसूर की पूरी फसल खरीदने का किया वादा। यह खरीद नैफेड व NCCF द्वारा की जाएगी।
★ केंद्रीय पूल में दलहनों का स्टॉक 15.38 लाख टन है जिसमें से 9.01 लाख टन PSF और 6.3 लाख टन PSS की मात्रा है।
★ सरकार ने 31 मार्च 2025 तक उड़द का आयात जारी रखा। तुवर आयात अवधि 31 मार्च 2026 तक निधारित। चना आयात अवधि 31 मार्च 2025 तक निधारित उसके बाद चना का उत्पादन व भाव देखकर फैसला होगा कि आयात अवधि को आगे बढ़ाया जाये या नहीं।
★ भारत ब्रांड के तहत रिटेल में भी दलहनों की बिक्री की गयी, जिससे कीमतों पर पड़ा असर।
★ NFSM के तहत धान, तिलहन एवं अन्य फसलों के एरिया को दलहन में परिवर्तित किया जायगा। देश में हाई यील्ड वेरायटी के बीज भी उपलब्ध हो रहे हैं। 2018-19 के बाद सरकार ने दलहनों की MSP स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार की।
★ दलहनों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए 1000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया जिससे दलहन उत्पादन बढे।
★ दलहन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात नियम में बार-बार किये गये बदलाव साथ ही स्टॉक लिमिट भी लगाई गयी।
★ मंत्री ने IPGA का धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से दलहनों में जागरूकता बढ़ती है।