इसबगोल में मंदे की सम्भावना नहीं

01-Jan-2026 05:54 PM

नई दिल्ली। वर्तमान में इसबगोल के भाव सीमित दायरे में बने हुए हैं। लेकिन उत्पादक केन्द्रों पर कमजोर बिजाई के कारण धारणा तेजी की बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि कमजोर बिजाई के समाचारों से नवम्बर-दिसंबर माह के दौरान इसबगोल के भाव 12/15 रुपए प्रति किलो तेजी के साथ बोले जा रहे थे। लेकिन बढ़े भावों पर मांग प्रभावित होने से बढ़ते भाव रुक गये हैं। सूत्रों का कहना है कि आगामी दिनों में मांग निकलने के साथ ही कीमतों में फिर तेजी बनेगी।

इसबगोल के प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में इस वर्ष इसबगोल की बिजाई गत वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत ही होने के समाचार मिल रहे हैं। राजस्थान में देश के कुल उत्पादन का 70-75 प्रतिशत इसबगोल का उत्पादन होता है जबकि 25/30 प्रतिशत का योगदान गुजरात राज्य का रहता है। गुजरात कृषि विभाग द्वारा जारी किए गये आकड़ों के अनुसार 29 दिसंबर तक राज्य में 23257 हेक्टेयर में बिजाई की गयी है जबकि गत वर्ष इसी समयअवधि के दौरान 24560 हेक्टेयर में बिजाई की गयी थी।

घटेगा उत्पादन: उत्पादक केन्द्रों से मिल रहे बिजाई के समाचारों को देखते हुए सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि दुसरे वर्ष भी देश में इसबगोल की पैदावार कम रहेगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 के दौरान देश में इसबगोल का उत्पादन 38/40 लाख बोरी रह गया। आगे मार्च-अप्रैल में फसल और भी कम रहने के समाचार मिल रहे हैं।

मंदा नहीं: सूत्रों का कहना है कि इसबगोल की वर्तमान कीमतों में अधिक मंदे की सम्भावना नहीं है। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर इसबगोल के क्वालिटी अनुसार भाव 100/130 रुपए प्रति किलो बोले जा रहे हैं। व्यापारिक अनुमान है कि आगामी दिनों में मांग निकलने के साथ ही कीमतों में 8/10 रुपए प्रति किलो की तेजी संभव है। उल्लेखनीय है कि विगत दो वर्षों से उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने के कारण पैदावार में कमी आ रही है।

निर्यात घटा: चालू वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम सात माह में इसबगोल निर्यात में गिरावट आई है। अक्टूबर 2025 के दौरान भी इसबगोल का निर्यात 4022.20 टन का हुआ है जबकि गत वर्ष इसी समयअवधि में निर्यात 5741.10 तिओं किया गया था। अप्रैल-अक्टूबर 2025 में इसबगोल का निर्यात 37741.60 टन का हुआ है जबकि अप्रैल-अक्टूबर 2024 के दौरान 38725.80 टन का निर्यात किया गया था।