जीएसटी की दरों में युक्तिसंगत संशोधन का प्रयास आरंभ
16-Aug-2025 11:34 AM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के ढांचे में सुधार करने का प्रयास आरंभ कर दिया है ताकि आम आदमी को महंगाई से कुछ राहत मिल सके।
हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि जीएसटी कर सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिससे देश को लाभ हुआ है मगर वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जीएसटी के ढांचे में महत्वपूर्ण सुधारों का प्रयास और प्रस्ताव किया जा रहा है जो तीन स्तरों- संरचनात्मक सुधार, दरों का युक्तिकरण और रहन-सहन की सुगमता पर केन्द्रित है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक अगली पीढ़ी के सुधार के लिए जीएसटी के अंतर्गत टैक्स की दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा जिससे समाज के सभी वर्गों को और खासकर आम आदमी, महिलाओं, विद्यार्थियों, माध्यम वर्ग तथा कृषक समुदाय को फायदा होगा। टैक्स की दरों को युक्तिसंगत बनाकर वर्गीकरण सम्बन्धी विवादों को कम या खत्म किया जा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय जीएसटी के अंतर्गत टैक्स के चार स्लैब को घटाकर दो पर स्थिर रखने का प्रयास कर सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स की दर घटाई जा सकती है जबकि विलासिता सम्बन्धी चीजों पर टैक्स बढ़ाया जा सकता है।
चूंकि जीएसटी से सरकार को अत्यन्त विशाल राजस्व प्राप्त होता है इसलिए कुल मिलाकर वह इस राजस्व को घटाना नहीं चाहेगी लेकिन टैक्स की दरों को इस तरह से युक्तिसंगत बनाया जा सकता है कि आम आदमी पर उसका कम से कम भार पड़ सके।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि जीएसटी सुधार से प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों को मजबूत बनाने, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने, टैक्स की दरों में अधिक स्थिरता सुनिश्चित करने और व्यापार की सुगमता को बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
