जीएसटी में सुधार के मुद्दे पर मंत्री समूह की बैठक शीघ्र होने की संभावना

18-Aug-2025 01:41 PM

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा था कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) एक महत्वपूर्ण टैक्स रिफॉर्म है और इससे देश को लाभ हुआ है। लेकिन इसकी दर को युक्ति संगत बनाने की आवश्यकता है।

इसके लिए एक मंत्री समूह की घोषणा की गई है जिसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, पश्चिम बंगाल तथा कर्नाटक के वित्त या राजस्व मंत्री शामिल हैं। प्रस्तावित जीएसटी पर विचार विमर्श के लिए इस मंत्री समूह की मीटिंग शीघ्र ही होने वाली है। 

समझा जाता है की प्रधानमंत्री के सम्बोधन से पूर्व इन मंत्रियों के साथ प्रस्तावित जीएसटी सुधार पर चर्चा की गई थी। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विजन के साथ केन्द्र सरकार ने तीन स्तम्भों (आधारों) पर जीएसटी सुधार का प्लान बनाया है जिसमें ढांचागत बदलाव, दरों में समानता एवं रहन-सहन को आसान बनाना शामिल है। 

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के अधीनस्थ राजस्व विभाग के एक आंतरिक विश्लेषण में कहा गया है कि 5 प्रतिशत एवं 18 प्रतिशत के प्रस्तावित दो स्लैब ढांचे के अंतर्गत सकल जीएसटी राजस्व कम से कम वर्तमान वसूली (संग्रहण) के स्तर तक ऊंचा बना रहेगा।

अधिकांश वस्तुओं एवं सेवाओं को इन दो कर स्लैब के अधीन शामिल किए जाने की संभावना है। उदाहरणस्वरूप, आम आदमी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों तथा किसानों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट अथवा लघु उद्यमियों एवं एमएसएमई उपक्रमों के लिए आवश्यक सामानों पर 5 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाएगा।

इससे न केवल उस पर टैक्स का भार घट जाएगा बल्कि खपत को भी प्रोत्साहन मिलेगा जिससे उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। शेष अधिकांश वस्तुओं एवं सेवाओं पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जा सकता है। 

वर्तमान समय में जीएसटी ढांचे के अंतर्गत 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत 18 प्रतिशत एवं 28 प्रतिशत के टैक्स स्लैब प्रचलित हैं। इसके साथ-साथ 1 प्रतिशत से लेकर 2.90 प्रतिशत तक का क्षतिपूर्ति सेस भी लागू है।

यह ऊंचा सेस कुछ खास उत्पादों- कार, रेफ्रीजरेटर, एयर कंडीशनर, पान मसाला, तम्बाकू एवं सिगरेट आदि पर लगा हुआ है। ऐसा लगता है कि 12 प्रतिशत का टैक्स स्लैब खत्म किया जा सकता है और 40 प्रतिशत का एक स्पेशल जीएसटी रेट प्रचलित किया जा सकता है।